चाईबासा: भारतीय राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (INTUC) के प्रांतीय अध्यक्ष शिव शंकर मुंडा ने पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपकर एसीसी (ACC) सीमेंट कारखाना के अचानक बंद होने और इसके स्वामित्व हस्तांतरण पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस कदम से लगभग 1500 कर्मचारियों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
क्या है मामला?
INTUC का कहना है कि एसीसी सीमेंट कारखाना पूरी तरह से आदिवासियों की जमीन पर स्थित है, जिसे 1947 से सफलतापूर्क संचालित किया जा रहा था। यूनियन का आरोप है कि छोटानागपुर काश्तकारी (CNT) अधिनियम की धारा 49 के तहत जिस उद्देश्य के लिए जमीन ली गई थी, वह पूरा हो जाने के बाद अब कारखाना बंद कर इसका हस्तांतरण किया जा रहा है, जो कानूनन गलत है।
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INTUC की मुख्य मांगें:
- कारखाना सुचारू रखें: एसीसी सीमेंट कारखाना को जनहित में पूर्व की भांति सुचारू रूप से संचालित करने का आग्रह किया गया है।
- 15 दिनों का अल्टीमेटम: प्रशासन को 15 दिनों का समय देते हुए यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि कारखाना चालू नहीं किया गया, तो CNT एक्ट की धारा 49 के प्रावधानों के अनुसार आदिवासियों की जमीन उन्हें वापस की जाए।
- साजिश का आरोप: यूनियन ने आरोप लगाया है कि बंद कमरों में हो रही बैठकों और महंगी गाड़ियों की आवाजाही से यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि अडानी समूह द्वारा प्लांट को बंद करने की सुनियोजित साजिश रची गई है, जिसका सीधा असर 1500 गरीब श्रमिकों पर पड़ रहा है।
शिव शंकर मुंडा ने इस मामले में प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है ताकि क्षेत्र के मजदूरों के हितों की रक्षा की जा सके।




