19 बरस बाद मिला,पांच साल के लिए ब्लड बैंक का लाइसेंस!
बुनियादी सुविधाओं की जंग अभी जारी
चाईबासा, 25 जून: 19 साल बाद आखिरकार सदर अस्पताल, चाईबासा के रक्त अधिकोष (ब्लड बैंक) को पांच साल की अवधि वाला लाइसेंस प्राप्त हो गया है। इस उपलब्धि के बाद जिले के लोगों ने राहत की सांस ली है, लेकिन यह सफलता स्वास्थ्य व्यवस्था की एक कड़वी सच्चाई को भी उजागर कर गई है। जिस कोल्हान प्रमंडल ने राज्य को चार मुख्यमंत्री और चार मंत्री दिए, वहां एक ब्लड बैंक के लाइसेंस के लिए दो दशक से अधिक का लंबा इंतजार करना पड़ा।
जश्न के बीच उठ रहे सवाल: क्या सिर्फ लाइसेंस मिलना ही विकास है?
लाइसेंस मिलने के बाद चाईबासा में खुशी का माहौल है। झामुमो ने इस उपलब्धि का श्रेय जिले के सभी विधायकों और सांसदों के संयुक्त प्रयासों को दिया है। सोशल मीडिया पर जनप्रतिनिधियों और आंदोलन की बात करने वाले नेताओं द्वारा एआई (AI) जेनरेटेड पोस्टर साझा किए जा रहे हैं और प्रेस विज्ञप्तियां जारी की जा रही हैं।
हालांकि, नागरिक समाज और जागरूक आम लोगों के मन में अब कड़े सवाल उठने लगे हैं-
- व्यवस्था पर सवाल: रक्त दान के नाम पर रक्त तो ले लिया जाता है, लेकिन मरीजों को रक्त प्राप्त करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ता है। इसके अलावा, ब्लड बैंक में मौजूद स्टॉफ की बेरुखी मरीजों के लिए एक अतिरिक्त समस्या बनी हुई है।
अधूरी स्वास्थ्य सुविधाएं: लाइसेंस मिलना एक महत्वपूर्ण कदम जरूर है, लेकिन क्या हम कभी जिला अस्पताल के डायलिसिस सेंटर, आईसीयू (ICU), और ट्रॉमा सेंटर के बर्न यूनिट, ऑक्सीजन प्लांट सुचारू रूप से चलने की खुशी मना पाएंगे?
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- गरीबों की पहुंच से दूर जांच: क्या जिले का एक गरीब मरीज कभी ज़िला अस्पताल में निःशुल्क सीटी स्कैन (CT Scan) की सुविधा का लाभ उठा पाएगा?वर्तमान मे तो इसका जवाब किसी के पास नहीं है!भविष्य का पता नहीं…
भविष्य की उम्मीदें
यह सच है कि लाइसेंस मिलने से अब पश्चिमी सिंहभूम जिले के थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों, गर्भवती महिलाओं, दुर्घटना पीड़ितों तथा गंभीर रोगियों को सुरक्षित एवं नियमित रूप से रक्त उपलब्ध होने की उम्मीद जगी है। अब मरीजों को रक्त के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और आपातकालीन स्थितियों में समय पर उपचार संभव हो सकेगा।
लेकिन, स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती यहीं खत्म नहीं होती। आम जनता और बुद्धिजीवी वर्ग अब यह उम्मीद कर रहा है कि जिस तत्परता के साथ ब्लड बैंक के लाइसेंस की खुशी मनाई जा रही है, उसी तत्परता के साथ अस्पताल की अन्य रुकी हुई और अधूरी सेवाओं को शुरू करने के लिए भी प्रेस विज्ञप्तियां जारी होंगी और धरातल पर काम दिखाई देगा।
क्या इन लंबित स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान पर भी कोई ‘प्रेस विज्ञप्ति’ जल्द आएगी? चाईबासा की जनता को अब उस जवाब का इंतजार है।



