अलग-अलग लैब की ब्लड रिपोर्ट में बड़ा अंतर, मरीज की जान से खिलवाड़ का आरोप
चायबासा: पश्चिम सिंहभूम जिले का सदर अस्पताल एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली और लैब रिपोर्ट की विश्वसनीयता को लेकर सवालों के घेरे में है। अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगा है। मामला एक मरीज के ब्लड ग्रुप की जांच से जुड़ा है, जिसमें सरकारी अस्पताल और निजी लैब की रिपोर्ट में भारी अंतर सामने आया है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, सदर अस्पताल, चाईबासा की पैथोलॉजी लैब में मरीज सुरेंद्र बोईपाई की जांच की गई। 11 जून 2026 को जारी की गई सरकारी लैब की रिपोर्ट में मरीज का ब्लड ग्रुप ‘AB पॉजिटिव’ बताया गया।
वहीं, जब इसी मरीज ने 17 जून 2026 को ‘लाइफ लाइन लैबोरेटरी’ से अपनी जांच कराई, तो वहां की रिपोर्ट में ब्लड ग्रुप ‘O पॉजिटिव’ पाया गया।
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सरकारी व्यवस्था पर उठे सवाल
एक ही मरीज की दो अलग-अलग जांच रिपोर्टों में ब्लड ग्रुप का अलग-अलग आना मेडिकल लापरवाही की ओर इशारा करता है। यदि किसी आपात स्थिति में मरीज को गलत ब्लड ग्रुप चढ़ा दिया जाता, तो यह जानलेवा साबित हो सकता था।

गौरतलब है कि सदर अस्पताल पहले भी विवादों में रहा है। कुछ महीने पूर्व एनीमिया के 5 मरीजों को गलत (संक्रमित) खून चढ़ाने का मामला सामने आया था, जिस पर हाई कोर्ट ने भी कड़ा रुख अपनाया था। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने अस्पताल प्रबंधन की साख पर बट्टा लगा दिया है।
मरीजों में हड़कंप
इन दो विरोधाभासी रिपोर्ट्स के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों में भारी आक्रोश है। लोग अब सवाल पूछ रहे हैं कि यदि अस्पताल की लैब में ही जांच त्रुटिपूर्ण है, तो आम मरीज अपनी जान किसके भरोसे छोड़े? फिलहाल, अस्पताल प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन जांच कमेटी गठित होने की चर्चाओं के बाद से अस्पताल के चिकित्सक और कर्मियों में हड़कंप की स्थिति है।



