अब 1 प्रोजेक्ट के अनुभव पर भी मिलेगी एंट्री!
राँची: झारखंड सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग ने राज्य में माइनिंग और ड्रिलिंग क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने और टेंडर प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी व प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने भूगर्भीय अन्वेषण (Geological Exploration) से जुड़ी ड्रिलिंग योजनाओं के नियमों में ऐतिहासिक ढील दी है, जिससे अब अधिक संख्या में कंपनियां सरकारी टेंडर में हिस्सा ले सकेंगी।
क्या हैं बड़े बदलाव?
सरकार ने उन कड़ी शर्तों को हटा दिया है जो पहले कई योग्य कंपनियों के लिए राह का रोड़ा बनी हुई थीं:
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- 5 प्रोजेक्ट्स की बाध्यता खत्म: पहले किसी भी कंपनी को टेंडर में भाग लेने के लिए पिछले 10 वर्षों में न्यूनतम 5 ड्रिलिंग प्रोजेक्ट्स पूरा करने का अनुभव होना अनिवार्य था। अब इसे पूरी तरह हटा दिया गया है।
- ड्रिलिंग क्षमता का नया पैमाना: अब प्रोजेक्ट्स की संख्या मायने नहीं रखेगी, बल्कि कंपनी को केवल यह साबित करना होगा कि पिछले 10 वर्षों में उसने कुल 5,000 मीटर की ड्रिलिंग पूरी की है।
- माइनिंग अनुभव में राहत: पहले अनिवार्य था कि कुल अनुभव में से कम से कम 2 प्रोजेक्ट माइनिंग सेक्टर के हों। अब इसे घटाकर सिर्फ 1 माइनिंग प्रोजेक्ट कर दिया गया है।
कंपनियों को मिलेगा सीधा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियमों के लचीले होने से न केवल प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि छोटे और मध्यम स्तर की अनुभवी कंपनियां भी अब झारखंड के माइनिंग सेक्टर में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर पाएंगी। इससे प्रोजेक्ट्स में तेजी आएगी और खनन अन्वेषण कार्य में गतिशीलता आएगी।
आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई गई
नियमों में संशोधन के साथ ही विभाग ने ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (EOI) जमा करने की समय सीमा भी बढ़ा दी है। अब इच्छुक कंपनियां 01 जुलाई 2026, दोपहर 1:30 बजे तक अपना आवेदन जमा कर सकती हैं।



