चाईबासा से उठी मांग, राजनीतिक दलों में दिखने लगी है अभूतपूर्व एकजुटता
चाईबासा (झारखंड): झारखंड की राजनीति के पुरोधा और कोल्हान के जन-जन के नेता रहे स्व. बागुन सुम्बुरुई को मरणोपरांत ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित करने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। इस मांग ने अब स्थानीय स्तर से ऊपर उठकर राष्ट्रीय राजनीति के गलियारों तक दस्तक दे दी है। चाईबासा लाइव के संस्थापक और झारखंड जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष जीतेन्द्र ज्योतिषी द्वारा शुरू किए गए इस अभियान को अब राजनीतिक दलों का खुला समर्थन मिलने लगा है,लोग विचार से सहमत होने लगे है।
कोल्हान की राजनीति के एक युग का नाम
1924 में चाईबासा के भूता गांव में जन्मे बागुन सुम्बुरुई का जीवन संघर्ष और सेवा की अनूठी मिसाल रहा है। 1946 में अपने गांव के मुंडा बनने से लेकर पांच बार लोकसभा और चार बार विधानसभा तक का उनका सफर भारतीय संसदीय इतिहास में दर्ज है
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उन्होंने दरोगा प्रसाद राय, कर्पूरी ठाकुर और राबड़ी देवी जैसे मुख्यमंत्रियों के मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में कार्य किया। वे न केवल झारखंड आंदोलन के एक प्रमुख स्तंभ थे, बल्कि कोल्हान क्षेत्र के आदिवासियों के सबसे विश्वसनीय और लोकप्रिय चेहरों में से एक माने जाते थे। 2002-2004 के दौरान झारखंड विधानसभा के उपाध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका ने उन्हें एक कद्दावर संवैधानिक पद की गरिमा प्रदान की।
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दलगत राजनीति से ऊपर उठी मांग
बागुन सुम्बुरुई की सादगी और जनसेवा के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए अब राजनीतिक दल उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिलाने के लिए एक मंच पर आते दिख रहे हैं:
- कांग्रेस की पहल: हाल ही में कांग्रेस पार्टी ने इस संबंध में राष्ट्रपति को औपचारिक पत्र लिखकर स्व. बागुन सुम्बुरुई को ‘पद्म भूषण’ देने का आग्रह किया है।
- भाजपा का समर्थन: भाजपा के वरिष्ठ नेता अनूप सुल्तानिया ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे कोल्हान के गौरव से जोड़कर देखा है। उन्होंने कहा कि, “बागुन सुम्बुरुई जी का व्यक्तित्व दलगत राजनीति से बहुत ऊंचा था। मैं इस मांग का पुरजोर समर्थन करता हूं और इस विषय पर जल्द ही भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ चर्चा कर केंद्र सरकार तक अपनी बात पहुंचाऊंगा।”
एक जननेता को सच्ची श्रद्धांजलि
चाईबासा लाइव के संस्थापक और इस अभियान के सूत्रधार जीतेन्द्र ज्योतिषी का कहना है कि, “बागुन सुम्बुरुई केवल एक राजनेता नहीं थे, वे कोल्हान की संस्कृति और संघर्ष की आवाज थे। पांच बार सांसद और चार बार विधायक रहे इस नेता ने अपना पूरा जीवन समाज के वंचित वर्गों के उत्थान में लगा दिया। उन्हें पद्म भूषण मिलना न केवल उनके प्रति सम्मान होगा, बल्कि यह कोल्हान की जनता की भावना का भी सम्मान होगा।”
क्षेत्र के प्रबुद्धजन और उनके समर्थक इस बात को लेकर आशान्वित हैं कि केंद्र सरकार इस मांग को गंभीरता से लेगी, ताकि एक ऐसे समर्पित जननेता को राष्ट्रीय फलक पर वह सम्मान मिल सके जिसके वे वास्तव में हकदार रहे हैं।



