पश्चिमी सिंहभूम में कुपोषण के खिलाफ जमीनी जंग

पश्चिमी सिंहभूम में कुपोषण के खिलाफ जमीनी जंग:

1 लाख 2,716 बच्चों की जांच में सामने आए 1,543 कुपोषित बच्चे, महिलाओं की उम्मीदों के बीच पुरुषों की उदासीनता बनी चुनौती

jitendra jyotishi

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झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुधारने के लिए चलाए जा रहे अभियानों के बीच एक महत्वपूर्ण और खोजपरक रिपोर्ट सामने आई है। जिले में कुपोषण की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए किए गए हालिया सर्वे और स्वास्थ्य जांच के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि जमीनी स्तर पर स्थिति कितनी संवेदनशील है और इसके समाधान के लिए किस प्रकार की सामूहिक पहल की आवश्यकता है।
​आंकड़ों की जुबानी: क्या कहते हैं सर्वे के प्रतिशत?
​उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले में लगभग 1,लाख 2,716 बच्चों की कुल जांच या लक्षित सर्वे किया गया। इस व्यापक पैमाने पर की गई जांच में कुल 1,543 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं।
​प्रतिशत कम, लेकिन चुनौती गंभीर
​यद्यपि कुल बच्चों की संख्या के मुकाबले 1.54% की यह दर पहली नजर में कम लग सकती है, लेकिन बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक भी बच्चा कुपोषित होना एक गंभीर चिंता का विषय है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों और बच्चों की वास्तविकता को बयां करता है जिन्हें समय पर सही पोषण और देखभाल की सख्त जरूरत है।
​महिलाओं की अग्रणी भूमिका बनाम पुरुषों की उदासीनता
​इस पूरी रिपोर्ट का सबसे सकारात्मक और प्रेरणादायक पहलू यह है कि गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों से लेकर घर-घर तक इस आंकड़े को सुधारने और बच्चों की सेहत पर नजर रखने का जिम्मा महिलाओं ने अपने कंधों पर उठा लिया है। माताएं और महिला स्वयं सहायता समूह आगे आकर बच्चों का नियमित वजन तौलने, पौष्टिक आहार तैयार करने और माताओं को जागरूक करने का कार्य कर रही हैं।
​हालांकि, इस खोजपरक पड़ताल में यह बात भी प्रमुखता से उभरकर सामने आई है कि जहां महिलाएं इस सामाजिक लड़ाई में सबसे आगे खड़ी हैं, वहीं पुरुषों की सहभागिता अभी भी उस स्तर पर नहीं दिख रही जैसी इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए अपेक्षित है।
​पश्चिमी सिंहभूम से सामने आए ये आंकड़े एक तरफ जहां प्रशासन और महिला कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सफलता को रेखांकित करते हैं, वहीं दूसरी ओर यह चेतावनी भी देते हैं कि जब तक समाज के सभी वर्ग—विशेषकर पुरुष—इस मुहिम में सक्रिय रूप से हाथ नहीं बंटाएंगे, तब तक कुपोषण मुक्त समाज का सपना पूरी तरह से साकार नहीं हो सकता। 1.54% के इस आंकड़े को शून्य पर लाने के लिए अब समाज के हर स्तर पर संयुक्त प्रयासों की दरकार है।

The Voice Live 24x7

The Voice Live 24x7 संपादक प्रोफाइल जीतेन्द्र ज्योतिषी वर्तमान में the voice के प्रधान सम्पादक के साथ 'झारखंड जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन'के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं..