पश्चिमी सिंहभूम में विकास की राह पर ‘भारी’ पड़े आयरन लदे वाहन, चाईबासा-असुरा मार्ग बना ग्रामीणों के लिये परेशानी का सबब 

पश्चिमी सिंहभूम में विकास की राह पर ‘भारी’ पड़े आयरन लदे वाहन, चाईबासा-असुरा मार्ग बना ग्रामीणों के लिये परेशानी का सबब 

चाईबासा/रांची: झारखंड का ‘रत्नगर्भा’ कहा जाने वाला पश्चिमी सिंहभूम जिला इन दिनों अपनी परिवहन व्यवस्था को लेकर कराह रहा है। जिले की प्रमुख सड़कों पर भारी वाहनों के अनियंत्रित परिचालन ने न केवल यातायात व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है, बल्कि ग्रामीणों के लिए ‘सड़क’ अब सुविधा के बजाय मुसीबत का सबब बन गई है।

चाईबासा-सिहपोखरिया-असुरा मार्ग: हादसों का कॉरिडोर

​ताजा मामला चाईबासा-सिहपोखरिया-असुरा मुख्य मार्ग का है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस मार्ग पर क्षमता से अधिक आयरन ओर (लौह अयस्क) लदे भारी वाहनों के चलने से सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है।

  • धूल और शोर: दिन-रात चलते भारी ट्रकों के कारण उड़ने वाली धूल ने आसपास के गांवों के लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। सांस से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
  • बदहाल ढांचा: भारी लोड के कारण सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे दोपहिया और पैदल चलने वाले ग्रामीणों के लिए हर कदम पर जान का जोखिम बना रहता है।

ग्रामीणों में पनप रहा हैआक्रोश: ठप पड़ रहा है जनजीवन

​असुरा और सिहपोखरिया के ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन माइनिंग और परिवहन से मिलने वाले राजस्व में तो दिलचस्पी दिखा रहा है, लेकिन जिन सड़कों से यह राजस्व निकल रहा है, उनकी मरम्मत और सुरक्षा पर किसी का ध्यान नहीं है। स्कूली बच्चों और मरीजों को अस्पताल ले जाने वाली एंबुलेंस के लिए भी अब यह रास्ता सुरक्षित नहीं बचा है। गौरतलब है की इस मार्ग पर पहले आयरन लदे भारी वाहन नही चला करते थे..

परिवहन विभाग और प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

​जिले की परिवहन व्यवस्था पर उठ रहे बड़े सवाल:

  1. ओवरलोडिंग पर लगाम क्यों नहीं? जिले में माइनिंग नियमों के उल्लंघन और ओवरलोडिंग की शिकायतें आम हैं, लेकिन फ्लाइंग स्क्वाड की सक्रियता धरातल पर कम दिखाई देती है.. वाहन चेकिंग के नाम पर केवल आम राहगीर को ही परेशान किया जाता है…
  2. वैकल्पिक मार्ग का अभाव: भारी मालवाहक वाहनों के लिए अलग ‘बायपास’ या ‘माइनिंग कॉरिडोर’ न होने के कारण ये वाहन उन सड़कों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो आम जनता के आवागमन के लिए बनाई गई हैं।
  3. सड़क मरम्मत में देरी: भारी वाहनों से क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की मरम्मत के लिए आवंटित फंड का सही समय पर उपयोग न होना भी एक बड़ी समस्या है।

राज्य स्तर पर गूंजने लगा है मामला

​पश्चिमी सिंहभूम की यह समस्या अब स्थानीय स्तर से निकलकर राज्य स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। कोल्हान क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों पर दबाव बढ़ रहा है कि वे विधानसभा में परिवहन के इस अराजक तंत्र के खिलाफ आवाज उठाएं। सूत्रों की माने तो

Ai जनरटेड सांकेतिक तस्वीर

ग्रामीणों ने दबी जुबान ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही चाईबासा-असुरा मार्ग पर भारी वाहनों के परिचालन को विनियमित (Regulate) नहीं किया गया और सड़क की मरम्मत नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन और सड़क जाम करने को मजबूर होंगे।

ब्यूरो रिपोर्ट: स्टेट डेस्क, रांची/चाईबासा

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The Voice Live 24x7 संपादक प्रोफाइल जीतेन्द्र ज्योतिषी वर्तमान में the voice के प्रधान सम्पादक के साथ 'झारखंड जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन'के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं..