विश्व रेडक्रॉस दिवस विशेष: चाईबासा में सेवा की ‘लाइफलाइन’ और संसाधनों का अभाव

चाईबासा, पश्चिमी सिंहभूम- हर साल 8 मई को पूरी दुनिया मानवता के अग्रदूत हेनरी ड्यूनेंट की याद में ‘विश्व रेडक्रॉस दिवस’ मनाती है। चाईबासा जैसे जनजातीय बहुल और आकांक्षी जिले (Aspirational District) में रेडक्रॉस सोसाइटी केवल एक संस्था नहीं, बल्कि गरीबों के लिए उम्मीद की आखिरी किरण रही है। हालांकि, आज यह संस्था अपनी गरिमा और सेवा भाव के बीच संसाधनों के अभाव से जूझ रही है।
1. अभावों के बीच चलती सेवा की गाड़ी

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पश्चिमी सिंहभूम जिले की रेडक्रॉस इकाई ने दशकों से आपदा, रक्तदान और स्वास्थ्य शिविरों में अग्रणी भूमिका निभाई है। लेकिन वर्तमान परिदृश्य में, संस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है
रक्तदान और भंडारण- चाईबासा ब्लड बैंक मुख्य रूप से रेडक्रॉस के सहयोग पर निर्भर है। जिले में थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया के मरीजों की बड़ी संख्या को देखते हुए रक्त की मांग हमेशा बनी रहती है, लेकिन आधुनिक उपकरणों और निरंतर रिप्लेसमेंट डोनर्स की कमी एक बड़ी बाधा है।
फंडिंग की समस्या-सरकारी अनुदान में अनिश्चितता और स्थानीय स्तर पर चंदा (Donations) कम होने के कारण दैनिक संचालन में कठिनाइयां आती हैं।
2. बुनियादी ढांचे की दरकार
चाईबासा रेडक्रॉस को एक आधुनिक डायग्नोस्टिक सेंटर’ और फिजियोथेरेपी यूनिट’की सख्त जरूरत है। वर्तमान में, कई गरीब मरीजों को बुनियादी जांचों के लिए निजी केंद्रों या बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। यदि जिला प्रशासन और सीएसआर (CSR) फंड के माध्यम से यहां सुविधाएं बढ़ाई जाएं, तो यह जिले के दूरदराज के क्षेत्रों जैसे मनोहरपुर या कुमारडुंगी के लोगों के लिए वरदान साबित होगा।
3. ‘स्वयंसेवकों’ की घटती संख्या
रेडक्रॉस की असली ताकत उसके वॉलिंटियर्स होते हैं। पिछले कुछ वर्षों में युवाओं का इस ओर रुझान कम हुआ है। लेख का एक मुख्य पहलू यह है कि जिले के कॉलेजों और स्कूलों में ‘जूनियर रेडक्रॉस’ (JRC)को फिर से सक्रिय करने की आवश्यकता है, ताकि आपदा के समय एक प्रशिक्षित दस्ता तैयार रहे।
“मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। चाईबासा रेडक्रॉस ने सीमित संसाधनों में भी कोविड काल से लेकर बाढ़ जैसी आपदाओं तक सराहनीय कार्य किया है, लेकिन अब इसे जन-भागीदारी और आधुनिक तकनीक के साथ मजबूती देने का समय है।”*
आगे की राह: क्या होना चाहिए?
कॉर्पोरेट सहयोग जिले में सक्रिय माइनिंग कंपनियों को अपने सीएसआर फंड का एक हिस्सा रेडक्रॉस के सुदृढ़ीकरण के लिए देना चाहिए।
प्रशासनिक समन्वय जिला प्रशासन को रेडक्रॉस के साथ मिलकर नियमित अंतराल पर स्वास्थ्य और जागरूकता शिविर आयोजित करने चाहिए।
डिजिटल उपस्थिति रक्तदाताओं की एक ऑनलाइन सूची तैयार की जानी चाहिए ताकि आपात स्थिति में सीधे संपर्क साधा जा सके।

रेडक्रॉस दिवस पर चाईबासा के प्रबुद्ध नागरिकों और प्रशासन को यह संकल्प लेना चाहिए कि जिस संस्था ने दशकों तक हमें सहारा दिया, उसे हम अभावों के कारण दम नहीं तोड़ने देंगे। संसाधनों का अभाव मानवता की सेवा के आड़े नहीं आना चाहिए।
प्रस्तुति
जीतेन्द्र ज्योतिषी
*अध्यक्ष, झारखंड जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन*

 

The Voice Live 24x7

The Voice Live 24x7 संपादक प्रोफाइल जीतेन्द्र ज्योतिषी वर्तमान में the voice के प्रधान सम्पादक के साथ 'झारखंड जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन'के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं..