झींकपानी ACC सीमेंट प्लांट बंदी मामला
चाईबासा: विश्वासनीय सूत्रों के हवाले से आयी बडी खबर मे पश्चिमी सिंहभूम के झींकपानी स्थित अडाणी एसीसी लिमिटेड की चाईबासा सीमेंट वर्क्स की प्रस्तावित बंदी पर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय सख्त हो गया है। सूत्रों की माने तो मंत्रालय ने इस मामले में दखल देते हुए एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच टीम का गठन किया है।
इस महत्वपूर्ण मामले में 16 जुलाई को सुनवाई निर्धारित की गई है।
INTUC का बड़ा आरोप: “आदिवासियों के रोजगार पर साजिश”
भारतीय राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (INTUC) के प्रांतीय अध्यक्ष शिव शंकर मुंडा ने इस मामले में केंद्र सरकार को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं:

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- साजिश का आरोप: INTUC का आरोप है कि प्लांट की प्रस्तावित बंदी एक गहरी साजिश और रणनीति के तहत की जा रही है।
- स्थानीय हितों की अनदेखी: यह प्लांट 5वीं अनुसूची (5th Schedule) क्षेत्र में स्थित है, जहाँ स्थानीय रैयतों ने 30 वर्षों के लिए अपनी जमीन लीज पर दी है, जो अभी भी प्रभावी है।
- प्रचुर संसाधन: जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और इंडियन ब्यूरो ऑफ माइन्स की रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ चूना पत्थर का प्रचुर भंडार मौजूद है।
- SIT गठन की मांग: INTUC ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए SIT का गठन हो, जिसमें जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, इंडियन ब्यूरो ऑफ माइन्स और झारखंड सरकार के माइन्स एंड जियोलॉजिकल विभाग के प्रतिनिधि शामिल हों।
जांच और कार्रवाई के मुख्य बिंदु:
- विशेष टीम का गठन: उप मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय), धनबाद के निर्देश पर गठित इस टीम का नेतृत्व हजारीबाग के सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय) करेंगे।
- गहराई से जांच: यह टीम प्लांट की प्रस्तावित बंदी से जुड़े सभी जमीनी तथ्यों, कानूनी प्रक्रियाओं और श्रमिकों के हितों से जुड़े पहलुओं की गहन पड़ताल करेगी।
- प्रभावित आबादी: यदि प्लांट बंद होता है, तो इसके 10 से 15 किलोमीटर के दायरे में बसे आदिवासी समुदाय के लोग सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।
केंद्र सरकार के इस कदम से प्लांट प्रबंधन पर दबाव बढ़ गया है।



