झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और जीवन-दर्शन पूरे राष्ट्र की अमूल्य धरोहर: संतोष कुमार गंगवार
राँची, 06 जून 2026: माननीय राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार ने आज ऑड्रे हाउस, राँची में आयोजित “आदि वार्ता – A Tribal Conclave” कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, सामुदायिक जीवन मूल्यों और प्रकृति के साथ उनके गहरे जुड़ाव की सराहना करते हुए इसे पूरे राष्ट्र की अमूल्य धरोहर बताया।
राज्यपाल ने कहा कि जनजातीय परंपराएँ सह-अस्तित्व, सामाजिक समरसता और सामूहिक उत्तरदायित्व का संदेश देती हैं, जिसके संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी हम सभी की है।
सांस्कृतिक अस्मिता की सुरक्षा के साथ हो प्रगति

अपने संबोधन में राज्यपाल महोदय ने जनजातीय पहचान, संवैधानिक अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वदेशी ज्ञान परंपरा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी समाज का विकास तभी सार्थक है, जब उसकी मूल पहचान और सांस्कृतिक अस्मिता सुरक्षित रहे। भारतीय संविधान ने अनुसूचित जनजातियों के उत्थान के लिए अनेक प्रावधान किए हैं। समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाना और प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना सभी का दायित्व है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तीकरण पर जोर
राज्यपाल ने सुदूरवर्ती एवं दुर्गम क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। उन्होंने इस दिशा में सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करने का आह्वान किया। राज्य के सुदूर गाँवों के अपने भ्रमण का जिक्र करते हुए उन्होंने जनजातीय महिलाओं की आत्मनिर्भरता और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से उनके योगदान की विशेष सराहना की।
पर्यावरण संरक्षण का वैश्विक संदेश
विश्व पर्यावरण दिवस का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से जल, जंगल और जमीन को अपने अस्तित्व का आधार मानता आया है। आज जब पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब जनजातीय जीवन-दर्शन मानवता को यह संदेश देता है कि विकास और प्रकृति का संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। यही स्थायी विकास (Sustainable Development) का वास्तविक मार्ग है।
युवाओं से आधुनिक ज्ञान और तकनीक अपनाने का आह्वान
माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में शुरू की गई ‘जनजातीय गौरव दिवस’, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय और ‘पीएम-जनमन’ जैसी ऐतिहासिक योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। इसके साथ ही उन्होंने जनजातीय युवाओं का आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों, भाषा, लोककला और पारंपरिक ज्ञान से जुड़े रहते हुए आधुनिक ज्ञान, विज्ञान और तकनीक को अपनाएँ और हर क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित करें।
राज्यपाल ने अंत में कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी विविधता में है। ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब जनजातीय समाज की भागीदारी, सम्मान और नेतृत्व को समान महत्व मिलेगा। उन्होंने सभी से आधुनिकता और परंपरा के संतुलित समन्वय के साथ एक समावेशी समाज के निर्माण का संकल्प लेने की अपील की।



