झारखंड मछली उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर, अब पड़ोसी राज्यों को कर रहा निर्यात
रांची। झारखंड मत्स्य पालन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रहा है। राज्य सरकार की प्रभावी रणनीतियों और मत्स्य निदेशालय के प्रयासों से झारखंड न केवल मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया है, बल्कि अब बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों को मछली निर्यात भी कर रहा है।
40 प्रतिशत की उत्पादन वृद्धि, निर्धारित लक्ष्यों की ओर कदम

मछली पालक
मत्स्य निदेशालय के निदेशक अमरेंद्र कुमार ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में राज्य में मछली उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
- वित्तीय वर्ष 2025-26 की उपलब्धि: 4.10 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के विरुद्ध 3.81 लाख मीट्रिक टन से अधिक का उत्पादन हुआ।
- नया लक्ष्य: सफलता से उत्साहित होकर, इस वर्ष के लिए उत्पादन लक्ष्य को बढ़ाकर 4.23 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है।
- प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना: इस योजना के तहत राज्य में अब तक कुल 15,000 केज किसानों को वितरित किए जा चुके हैं, जिनमें से 4,500 केज सीधे इस योजना के अंतर्गत प्रदान किए गए हैं।
महिला स्वावलंबन और रंगीन मछली पालन पर जोर
झारखंड में पहली बार रंगीन मछलियों के उत्पादन की पहल की गई है। महिला मत्स्यजीवी सहयोग समितियों का गठन कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए ओडिशा स्थित ‘केंद्रीय मीठे जल जीवपालन अनुसंधान संस्थान’ (CIFA) के सहयोग से महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें एक्वेरियम, फिल्टर, मोटर और अन्य जरूरी उपकरणों के साथ रंगीन मछली का वितरण किया गया है, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
विशेष पहल: मोती पालन और जनजातीय उत्थान
धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान:
वित्तीय वर्ष 2024-25 से 2028-29 तक संचालित इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत झारखंड के 223 प्रखंडों के 6,822 गांवों में अनुसूचित जनजाति के किसानों को लाभान्वित किया जा रहा है। इस योजना के तहत मत्स्य पालन के लिए 90 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य जनजातीय समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार और आधुनिक तकनीकी सहायता प्रदान करना है।
मोती पालन से बढ़ी आय:
राज्य के मत्स्य कृषक अब मछली पालन के साथ-साथ मोती पालन के गुर भी सीख रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा हजारीबाग जिले को मोती पालन के लिए ‘क्लस्टर सेंटर’ के रूप में चयनित किया गया है, जो राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
मत्स्य निदेशक अमरेंद्र कुमार ने विश्वास जताया है कि सरकार की इन निरंतर कोशिशों से राज्य के मत्स्य कृषक न केवल स्वावलंबी बनेंगे, बल्कि झारखंड मछली पालन के क्षेत्र में देश का एक अग्रणी राज्य बनकर उभरेगा।




