पश्चिमी सिंहभूम मे डीएमएफटी का गड़बड़ झाला

2000 करोड़ की गड़बड़ी पर मानसून सत्र में गूंजेगी आवाज़ , विपक्ष मांगेगा हिसाब

चाईबासा/रांची: झारखंड विधानसभा का आगामी मानसून सत्र हंगामेदार होने के आसार हैं। राजनितिक सूत्रों की माने तो जिला खनिज निधि (DMFT) में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा सदन में पूरी ताकत से गूंजने की तैयारी है। राजनीतिक गलियारों में इस विषय पर गरमागरम बहस छिड़ चुकी है और यह तय माना जा रहा है कि विपक्ष इस गड़बड़ झाले को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा करेगा।गौरतलब है की वित्तीय अनिमिताओ को लेकर लोक भवन और विधानसभा की विभिन्न समितियो तक यह आवाज़ आवेदन के रूप मे समर्पित है!

Post center

IMG-20260701-WA0366
IMG-20260701-WA0366

DMFT के प्रावधान मे अत्यंत स्पष्ट हैं। नियमों निधि का 100% उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के आदिवासियों और स्थानीय निवासियों के सामाजिक-आर्थिक कल्याण के लिए किया जाना अनिवार्य है। नियमावली में स्पष्ट निर्देश है कि राशि का व्यय केवल उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों, जैसे:

  • पेयजल एवं स्वच्छता
  • स्वास्थ्य सेवाएं
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
  • पर्यावरण संरक्षण
  • स्थानीय आजीविका के साधन

​यह खर्च ग्राम सभाओं की सीधी भागीदारी और पूर्ण पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। हालांकि, धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है।

चौंकाने वाले राज

सूत्रों के प्रारम्भिक संकेतो से पता चलता है कि प्रभावित जनता के उत्थान के बजाय, निधि का एक बड़ा हिस्सा रसूख दारों की झोली में डाल दिया गया। अब बड़ा सवाल यह है कि किन नियमों के तहत डीएमएफटी के काम आवंटित किए गए और योजना चयन में पारदर्शिता क्यों गायब थी?

​विपक्ष की रणनीति और सरकार की चुनौती

​मानसून सत्र के दौरान यह मुद्दा सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरेगा। यह केवल एक वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि उन गरीब निवासियों के अधिकारों का हनन है जो आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

The Voice Live 24x7

The Voice Live 24x7 संपादक प्रोफाइल जीतेन्द्र ज्योतिषी वर्तमान में the voice के प्रधान सम्पादक के साथ 'झारखंड जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन'के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं..