झारखंड सरकार में ‘अंदरूनी घमासान’, क्या गठबंधन में सब ठीक है?
रांची: झारखंड की राजनीति में उस वक्त उबाल आ गया जब कैबिनेट के कद्दावर मंत्री और कांग्रेस नेता राधाकृष्ण किशोर ने अपनी ही सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक कड़ा पत्र लिख दिया। इस पत्र ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि कांग्रेस और JMM गठबंधन के बीच की दरार को भी सतह पर ला दिया है।
1. ₹450 में गैस सिलेंडर: वादा बनाम हकीकत
राधाकृष्ण किशोर ने अपने पत्र में कांग्रेस के उस चुनावी वादे की याद दिलाई है, जिसमें जनता को 450 रुपये में गैस सिलेंडर देने की बात कही गई थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से अनुरोध किया है कि:
- या तो गैस सिलेंडर की कीमत सीधे 450 रुपये की जाए।
- या फिर उपभोक्ताओं को प्रति सिलेंडर 200 रुपये की सब्सिडी दी जाए।
2. अपनी ही पार्टी के नेतृत्व के खिलाफ ‘मोर्चा’
यह पत्र केवल एक मांग नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी राजनीतिक नाराजगी छिपी है। हाल ही में राधाकृष्ण किशोर ने झारखंड कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व और प्रभारी के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है।
- कोर कमेटी पर सवाल: उन्होंने 314 सदस्यों वाली कांग्रेस की नई कोर टीम को ‘ढीला-ढाला’ और पक्षपातपूर्ण बताया है।
- बेटे का इस्तीफा: मंत्री के बेटे प्रशांत किशोर ने भी संगठन में सचिव पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसे मंत्री की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है।
3. ‘एक आंख में सुरमा, दूसरी में काजल’
मंत्री ने संगठन की कार्यप्रणाली पर कटाक्ष करते हुए कहा कि प्रदेश कांग्रेस में “एक आंख में सुरमा और दूसरे में काजल” वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। उनके इस कड़े तेवर ने आगामी राज्यसभा चुनावों और गठबंधन की स्थिरता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
4. सियासी मायने: क्या है संदेश?
विशेषज्ञों का मानना है कि राधाकृष्ण किशोर का सीएम को यह पत्र लिखना असल में कांग्रेस के भीतर अपनी उपेक्षा के खिलाफ एक ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ का हिस्सा है। जनता से जुड़े संवेदनशील मुद्दे (गैस सब्सिडी) को उठाकर उन्होंने मुख्यमंत्री और अपनी ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
इनसाइड रिपोर्ट: वित्त मंत्री का यह कदम ऐसे समय में आया है जब झारखंड में ‘अबुआ बजट 2025-26’ की तैयारियां चल रही हैं। यदि सरकार इस मांग को अनसुना करती है, तो आगामी दिनों में विधानसभा के भीतर और बाहर गठबंधन के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
झारखंड की सत्ता में ‘ऑल इज वेल’ के नारों के बीच राधाकृष्ण किशोर की यह ‘लेटर बम’ वाली रणनीति आने वाले दिनों में किसी बड़े सियासी बदलाव की आहट भी हो सकती है।



