The वॉयस खास: प्यासा मनोहरपुर और सिस्टम का ‘खराब मोटर’

The वॉयस खास: प्यासा मनोहरपुर और सिस्टम का ‘खराब मोटर’

अबुआ अखाडा | विशेष रिपोर्ट

चाईबासा/मनोहरपुर: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिला स्थित मनोहरपुर से आई पेयजल संकट की रिपोर्ट केवल एक क्षेत्र की समस्या नहीं है, बल्कि यह राज्य में चल रही ‘नल-जल योजना’ के जमीनी सच का आईना है। जहाँ एक ओर केंद्र और राज्य सरकारें ‘हर घर जल’ का संकल्प दोहरा रही हैं, वहीं मनोहरपुर का यह सच प्रशासनिक दावों की पोल खोलता है।

तीन साल से बूंद-बूंद को तरसते 200 घर

​मनोहरपुर मुख्यालय के 200 से अधिक घरों में पिछले तीन वर्षों से सप्लाई का पानी बंद है। ग्रामीणों का पानी खरीदकर पीना प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। यह विडंबना ही है कि लोग तीन सालों से मात्र एक खराब पंप-मोटर के ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं। क्या एक मोटर को दुरुस्त करने के लिए तीन साल का समय भी कम है?

नीतिगत विफलता और जवाबदेही का अभाव

​मनोहरपुर की स्थिति यह स्पष्ट करती है कि बुनियादी ढांचे के निर्माण में जितनी तत्परता दिखाई जाती है, उसके रखरखाव में उतनी ही सुस्ती बरती जाती है।

  • सिस्टम की सुस्ती: तीन साल का लंबा समय किसी भी तकनीकी खराबी को दूर करने के लिए पर्याप्त होता है।
  • प्राथमिकता का अभाव: जनप्रतिनिधियों से लेकर विभागीय अधिकारियों तक, शिकायतों का अंबार लगा होने के बावजूद समाधान न निकलना यह बताता है कि जनता की प्यास सत्ता के गलियारों में प्राथमिकता नहीं रखती।

जल सहिया पर ठीकरा फोड़ना: व्यवस्था का हास्यास्पद तर्क

​जब व्यवस्था फेल होती है, तो दोष सबसे निचले स्तर के कर्मी पर मढ़ दिया जाता है। मनोहरपुर में भी ठीकरा ‘जल सहिया’ के माथे फोड़ा जा रहा है कि वे जल-कर वसूल नहीं कर पा रही हैं।

बड़ा सवाल: जिस जनता को तीन साल से पानी की एक बूंद नसीब नहीं हुई, वह किस आधार पर जल-कर का भुगतान करेगी? यह तर्क व्यवस्था की अपनी कमियों को छिपाने का एक ‘घटिया बहाना’ मात्र है।

 

व्यापार बनती बुनियादी जरूरत

​जब सरकारी पाइपलाइन सूखती है, तो पानी का बाजार फलने-फूलने लगता है। मनोहरपुर के लोगों का पानी खरीदकर पीना इस बात का प्रमाण है कि सरकारी विफलता का सीधा आर्थिक बोझ आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। जो पानी एक संवैधानिक अधिकार होना चाहिए था, वह अब एक ‘लग्जरी’ बन गया है।

निष्कर्ष: केवल पाइप नहीं, पानी भी चाहिए

​पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को यह समझना होगा कि केवल पाइप बिछा देने या नल लगा देने से ‘हर घर जल’ का लक्ष्य पूरा नहीं होता। असली सफलता तब है जब उन नलों से नियमित पानी आए।

‘The वॉयस खास’ की मांग:

  1. ​मनोहरपुर के इस ‘डेडलॉक’ को तुरंत तोड़ा जाए।
  2. ​जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
  3. ​सुनिश्चित किया जाए कि राज्य के अन्य हिस्सों में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।

प्रस्तुति:

Jitendra jyotishi

(संपादक एवं प्रदेश अध्यक्ष, JJWA)

The वॉयस खास – अबुआ अखाडा के लिये

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The Voice Live 24x7 संपादक प्रोफाइल जीतेन्द्र ज्योतिषी वर्तमान में the voice के प्रधान सम्पादक के साथ 'झारखंड जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन'के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं..