जापान से कांस्य पदक जीतकर लौटीं पुष्पा और संदीपा का गांव में हुआ भव्य स्वागत
सिमडेगा, झारखंड: जापान में आयोजित अंडर-18 महिला एशिया कप में कांस्य पदक जीतकर भारत का मान बढ़ाने वाली सिमडेगा की दो लाड़ली बेटियां—पुष्पा मांझी और संदीपा कुमारी—जब अपने गृह जिले लौटीं, तो उनका स्वागत किसी नायिका से कम नहीं था।
खासकर पुष्पा मांझी के जन्मस्थल, कुरडेग प्रखंड के आसनबेड़ा गांव में आयोजित भव्य स्वागत समारोह ने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी सुविधाओं की मोहताज नहीं होती।
गांव की माटी से अंतरराष्ट्रीय मंच तक
आसनबेड़ा के उसी खेल मैदान पर, जहाँ से पुष्पा मांझी ने कभी हॉकी स्टिक थामना सीखा था, आज उन्हें युवाओं ने मोटरसाइकिल रैली के साथ ढोल-नगाड़ों और आदिवासी परंपरा के बीच लाया। यह वही मैदान है जहाँ कोच तारिणी कुमारी और कमलेश्वर मांझी ने पुष्पा की प्रतिभा को पहचाना था।
पुष्पा का यह सफर प्रेरणादायक है:
- शुरुआत: आसनबेड़ा गांव का खेल मैदान।
- विकास: गोंडवाना खेल छात्रावास और लचरागढ़ हॉकी सेंटर।
- सफलता: सेंटर फॉर एक्सीलेंस में प्रशिक्षण और अब भारतीय टीम की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक।
”कुरडेग की पहली महिला अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी”
हॉकी झारखंड के उपाध्यक्ष मनोज कोनबेगी ने गर्व के साथ कहा, “कुरडेग प्रखंड ने 1975 के विश्व कप विजेता माइकल किंडो जैसे ओलंपियन दिए हैं, लेकिन पुष्पा मांझी ने इस क्षेत्र की पहली महिला अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी बनकर इतिहास रच दिया है।”
Post center
माँ का संघर्ष और पिता का गर्व
पुष्पा की माँ हीरामणि देवी ने भावुक होते हुए याद किया कि कैसे कभी वे बेटी को पढ़ाई छोड़कर खेलने जाने पर डांटती थीं, लेकिन आज उन्हें अपनी बेटी की सफलता पर गर्व है। वहीं, संदीपा कुमारी के पिता रंजीत मांझी ने बताया कि उनकी बेटी ने अपनी बड़ी बहन को देखकर जो सपना देखा था, उसे आज अपनी मेहनत से पूरा कर दिखाया है।
खेल संस्कृति को बढ़ावा देता ‘गोंडवाना मंच’
गोंडवाना आदिवासी कल्याण एवं विकास मंच के अध्यक्ष रामचंद्र मांझी और कोषाध्यक्ष कमलेश्वर मांझी ने इस उपलब्धि को पूरे क्षेत्र के लिए गौरवशाली बताया। मंच पिछले कई वर्षों से लगातार खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन कर ग्रामीण प्रतिभाओं को मुख्यधारा में लाने का प्रयास कर रहा है।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
आसनबेड़ा जैसे छोटे से गांव में सुविधाओं की कमी के बावजूद अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकलना यह दर्शाता है कि सिमडेगा की माटी में हॉकी का जुनून कूट-कूट कर भरा है। पुनीता मांझी और रीमा कुमारी जैसी अन्य खिलाड़ी भी इसी रास्ते पर चलकर झारखंड का नाम रोशन कर रही हैं।



