क्या चौक-चौराहों पर नई प्रतिमा लग सकती है?
Post center
चाईबासा। कोल्हान में झारखंड की महान विभूतियों की प्रतिमा लगाने को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर आदिवासी हो युवा महासभा और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) आमने-सामने हैं। दोनों पक्ष लगातार बयान दे रहे हैं, जिससे राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा गया है। सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर भी झामुमो और हो समाज के कुछ प्रतिनिधियों के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है।
इसी बीच इस पूरे विवाद में एक बड़ा कानूनी सवाल भी उठ रहा है—क्या किसी सार्वजनिक चौक, चौराहे या सड़क किनारे नई प्रतिमा लगाई जा सकती है?
सुप्रीम कोर्ट ने 18 जनवरी 2013 को SLP (Civil) No. 8519 of 2006 में दिए अपने आदेश में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को साफ निर्देश दिया था कि सार्वजनिक सड़क, फुटपाथ, चौक-चौराहों और अन्य सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर किसी भी नई प्रतिमा या स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इस आदेश का पालन कराना राज्य सरकार और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसलिए यदि किसी सार्वजनिक स्थान पर नई प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव आता है, तो प्रशासन को पहले यह देखना होगा कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश और संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं।
हालांकि, यदि प्रतिमा किसी निजी भूमि, सरकारी परिसर, पार्क, स्मारक स्थल या किसी अन्य विधिवत स्वीकृत स्थान पर लगाई जाती है, तो उसकी वैधानिक स्थिति अलग होगी और उसका निर्णय संबंधित नियमों व प्रशासनिक अनुमति के आधार पर होगा।
कानूनी जानकारों का कहना है कि प्रतिमा स्थापना जैसे संवेदनशील मामलों में भावनाओं के साथ-साथ कानून का पालन भी उतना ही जरूरी है। इसलिए कोल्हान में चल रहे इस विवाद का समाधान बयानबाजी से नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों, सरकारी नियमों और प्रशासनिक निर्णयों के आधार पर होना चाहिए।
कानूनी आधार:
सुप्रीम कोर्ट: SLP (Civil) No. 8519 of 2006
आदेश की तिथि: 18 जनवरी 2013
मुख्य निर्देश: सार्वजनिक सड़क, चौक-चौराहे, फुटपाथ और अन्य सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर नई प्रतिमा या स्थायी संरचना की अनुमति नहीं दी जाएगी।
(नोट: यह समाचार सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के कानूनी आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य किसी पक्ष का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि संबंधित कानूनी स्थिति को पाठकों के सामने रखना है।)



