सफलता की नई चाय: पिता की विरासत को ब्रांड में बदला दीनदयाल लखोटिया ने
1. विरासत और नवाचार का संगम
रांची के मदनलाल लखोटिया ने चार दशक पहले चाय पत्ती का जो व्यवसाय शुरू किया था, आज उनके पुत्र दीनदयाल लखोटिया ने उसे एक नई पहचान दी है। पिता के अनुभव को अपनी आधुनिक सोच के साथ जोड़कर उन्होंने ‘विष्णु टी कंपनी’ को एक नए आयाम पर पहुँचाया है।
2. ‘श्री विष्णु’ ब्रांड का उदय
पारंपरिक थोक व्यापार से हटकर, दीनदयाल ने खुद की ब्लेंडिंग शुरू की और “श्री विष्णु ब्रांड” के तहत चाय की पैकेजिंग की शुरुआत की।
- वैरायटी: श्री विष्णु गोल्ड, डायमंड और नमन जैसे प्रीमियम ब्रांड पेश किए।
- सुविधा: ग्राहकों के लिए 250 ग्राम और 500 ग्राम के पैक के साथ-साथ 10 और 20 रुपये के किफायती सैशे भी उपलब्ध कराए।
3. क्वालिटी ही सफलता की कुंजी
दीनदयाल का मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उनका मंत्र स्पष्ट है: “भीड़ से अलग दिखना है, तो क्वालिटी पर ध्यान दें।” आज उनके ब्रांड की लोकप्रियता केवल झारखंड तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बिहार, बंगाल और उड़ीसा तक फैली हुई है।
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4. सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी
व्यवसाय की भागदौड़ के बीच, लखोटिया परिवार सामाजिक सरोकारों के प्रति भी जागरूक है। जहाँ दीनदयाल व्यावसायिक जिम्मेदारियों के साथ सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहते हैं, वहीं उनकी पत्नी प्रिया लखोटिया (जेसीआई रांची उड़ान की प्रेसिडेंट) भी अपने स्तर पर समाज के लिए कार्य कर रही हैं।
सीख (Success Mantra)
“चाय का धंधा कभी मंदा नहीं होता, बशर्ते आप ग्राहकों को सिग्नेचर टेस्ट और गुणवत्ता दें।” — दीनदयाल लखोटिया
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