बोकारो की निकिता बनीं मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 की नेशनल फाइनलिस्ट
बोकारो, झारखंड: झारखंड की मेधा और संकल्प शक्ति का परचम अब राष्ट्रीय फलक पर लहरा रहा है। बोकारो स्टील सिटी स्थित टीटीपीएस ललपनिया की निवासी कुमारी निकिता ने ‘मिस यूनिवर्स इंडिया 2026’ की आधिकारिक नेशनल फाइनलिस्ट बनकर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे झारखंड का मान बढ़ाया है। एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर मॉडलिंग की दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाली निकिता की यह उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा का एक नया अध्याय है।
साधारण परिवार से असाधारण उपलब्धि तक
निकिता का सफर दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम की कहानी है। उनके पिता, लक्ष्मण कुमार टीटीपीएस में सहायक अभियंता के रूप में कार्यरत हैं, जबकि मां वंदना कुमारी एक कुशल गृहिणी हैं। एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली निकिता ने अपनी शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, ललपनिया से पूरी की। वर्ष 2023 में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने एक सुरक्षित करियर विकल्प को छोड़कर अपने जुनून, यानी मॉडलिंग को अपना लक्ष्य बनाया।
फ्रेशर्स डे से शुरू हुआ सपनों का सफर
निकिता के मॉडलिंग करियर की शुरुआत उनके कॉलेज के फ्रेशर्स कार्यक्रम से हुई। पहली बार रैंप पर कदम रखते ही उन्हें अपने भीतर के हुनर का एहसास हुआ। उसी दिन उन्होंने यह संकल्प लिया था कि वे न केवल इस क्षेत्र में आगे बढ़ेंगी, बल्कि एक दिन राष्ट्रीय मंच पर ताज पहनकर खड़ी होंगी। आज उनका वह सपना हकीकत के बेहद करीब है।
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राष्ट्रीय ताज पर नजर, वैश्विक मंच की तैयारी
मिस झारखंड और मिस बिहार जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी छाप छोड़ने के बाद, निकिता अब ‘मिस यूनिवर्स इंडिया 2026’ के ताज को हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। नेशनल फाइनलिस्ट के रूप में उनका चयन उनकी मेहनत और आत्मविश्वास का प्रमाण है। यदि वे यह राष्ट्रीय खिताब अपने नाम करती हैं, तो उन्हें विश्व स्तर पर होने वाली ‘मिस यूनिवर्स’ प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने का गौरव प्राप्त होगा।
खूबसूरती के साथ सेवा का भाव
निकिता की पहचान केवल उनकी खूबसूरती तक सीमित नहीं है। वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाती हैं। मॉडलिंग की भागदौड़ के बीच भी वे रांची स्थित आदिम जाति सेवा मंडल के तहत संचालित अनाथ बच्चों के विद्यालय में सक्रिय रूप से जुड़ी हैं। वे वहां के बच्चों को शिक्षा और मार्गदर्शन प्रदान कर समाजसेवा में अपना योगदान दे रही हैं।
निकिता की यह सफलता झारखंड के उन युवाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का साहस रखते हैं। पूरा राज्य अब उनकी अंतिम जीत के लिए गौरवान्वित होकर प्रार्थना कर रहा है।



