मसलिया में ‘दुमका पलाश टोटो’ योजना का शुभारंभ, 21 महिलाओं को मिले टोटो
टीवीएल डेस्क | दुमका
ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में दुमका जिले के मसलिया प्रखंड में शनिवार को एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। प्रखंड परिसर में आयोजित समारोह में विधायक बसंत सोरेन ने ‘दुमका पलाश टोटो’ योजना का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर सखी मंडल की 21 महिलाओं को टोटो (ई-रिक्शा) की चाबी सौंपकर उन्हें स्वरोजगार की नई राह से जोड़ा गया।
यह योजना झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) द्वारा ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। योजना के तहत संकुल संगठनों के माध्यम से महिलाओं को सामुदायिक निवेश निधि (CIF) से आसान किस्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे टोटो खरीदकर नियमित आय अर्जित कर सकें और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बना सकें।
कार्यक्रम के दौरान लाभुक महिलाओं को टोटो वितरण के साथ-साथ आजीविका संवर्धन के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान की गई। सामुदायिक निवेश निधि (CIF) के तहत ₹2,16,77,000 तथा कैश क्रेडिट लिंकेज (CCL) के माध्यम से ₹2,01,00,000 की परिसंपत्ति एवं वित्तीय सहायता का वितरण किया गया।
इस अवसर पर विधायक बसंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से सशक्त महिलाएं परिवार और समाज दोनों की मजबूती का आधार होती हैं
। ‘दुमका पलाश टोटो’ जैसी योजनाएं महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार के साथ आत्मविश्वास भी प्रदान करेंगी।
कार्यक्रम में मौजूद उप विकास आयुक्त अनिकेत सचान ने कहा कि जेएसएलपीएस की आजीविका आधारित योजनाएं ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। उन्होंने लाभुक महिलाओं से टोटो का सफल संचालन कर इसे आय का स्थायी स्रोत बनाने की अपील की।
समारोह में जिला एवं प्रखंड प्रशासन के अधिकारी, जेएसएलपीएस के जिला और प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, संकुल संगठनों की दीदियां तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने इस पहल को महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
‘दुमका पलाश टोटो’ योजना केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता, सम्मान और आर्थिक समृद्धि की नई पहचान बनकर उभर रही है। इससे महिलाओं की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ स्थानीय परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और जिले के समावेशी ग्रामीण विकास को नई गति प्राप्त होगी।
महिला सशक्तिकरण को मिली नई रफ्तार



