2005 से पूर्व बसे वनग्रामों को वनाधिकार कानून का लाभ देने की मांग, महामहिम राज्यपाल ने दिया समस्या के समाधान का आश्वासन 

अधिनियम-2006 के तहत ग्रामीणों द्वारा पूर्व में सामुदायिक वनाधिकार के लिए दावा प्रस्तुत किया गया था, लेकिन अब तक उसका निस्तारण नहीं

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चाईबासा/मनोहरपुर:
भारत आदिवासी पार्टी के पश्चिमी सिंहभूम जिलाध्यक्ष सुशील बारला ने झारखंड के महामहिम राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपकर सारंडा वन क्षेत्र में वर्ष 2005 से पूर्व से बसे वनग्रामों एवं परिवारों को वनाधिकार अधिनियम-2006 के तहत अधिकार प्रदान करने तथा संविधान प्रदत्त मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि मनोहरपुर प्रखंड के सारंडा क्षेत्र के लगभग 30–35 गांवों में 40–45 झारखंडी वनग्रामों के करीब 6000–7000 अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोग वर्षों से निवास कर रहे हैं। इनका मुख्य आधार खेती और पारंपरिक आजीविका है, लेकिन आज भी ये शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, यातायात और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि वनाधिकार अधिनियम-2006 के तहत ग्रामीणों द्वारा पूर्व में सामुदायिक वनाधिकार के लिए दावा प्रस्तुत किया गया था, लेकिन अब तक उसका निस्तारण नहीं किया गया है। साथ ही क्षेत्र में प्रस्तावित खनन परियोजना के कारण ग्रामीणों के विस्थापन की आशंका भी जताई गई है।
भारत आदिवासी पार्टी ने राज्यपाल से मांग की है कि वर्ष 2005 से पूर्व से बसे वनग्रामों की पहचान कर उन्हें शीघ्र वनाधिकार पट्टा दिया जाए तथा सभी गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, यातायात और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।
ज्ञापन के साथ वर्ष 2005 से पूर्व बसे वनग्रामों के नामों का सर्वे प्रतिवेदन भी संलग्न किया गया है।

The Voice Live 24x7

The Voice Live 24x7 संपादक प्रोफाइल जीतेन्द्र ज्योतिषी वर्तमान में the voice के प्रधान सम्पादक के साथ 'झारखंड जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन'के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं..