जनता का भरोसा जीतना खाकी की जवाबदेही
कोल्हान प्रमंडल ऐतिहासिक और भौगोलिक रूप से जितना समृद्ध है, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से उतना ही संवेदनशील भी रहा है। ऐसे में राज्य की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा का हालिया कोल्हान दौरा सिर्फ एक औपचारिक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को एक नया तेवर देने की गंभीर कवायद नजर आता है। सरायकेला में कानून-व्यवस्था की जमीनी समीक्षा और चाईबासा में नक्सल विरोधी अभियानों पर हुई उच्च स्तरीय बैठक इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पुलिस मुख्यालय अब जमीनी नतीजों को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है।
जनता का भरोसा और खाकी की जवाबदेही
सरायकेला-खरसावां जिले में समीक्षा के दौरान डीजीपी का यह रुख बेहद स्वागत योग्य है कि लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा। अक्सर यह देखा जाता है कि पुलिसिंग केवल फाइलों और लंबित मामलों के आंकड़ों में उलझ कर रह जाती है, जिससे आम नागरिकों में असुरक्षा का भाव पनपने लगता है। डीजीपी ने सटीक रूप से ‘पुलिस-पब्लिक कॉर्डिनेशन’ को मजबूत करने पर बल दिया है। लोकतंत्र में पुलिस की सफलता अपराधियों में खौफ पैदा करने से ज्यादा, आम जनता के भीतर सुरक्षा और विश्वास की भावना जगाने में निहित है। असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने के साथ-साथ अगर पुलिस प्रशासन पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई को अपनी प्राथमिकता बनाता है, तो निश्चित रूप से जिले की कानून-व्यवस्था में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
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चाईबासा: उग्रवाद के खिलाफ निर्णायक मोर्चे की तैयारी
डीजीपी के कोल्हान दौरे का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील पड़ाव चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम) की नक्सल समीक्षा बैठक रही। पश्चिमी सिंहभूम का अंदरूनी इलाका लंबे समय से उग्रवादी गतिविधियों और सुरक्षा बलों के कड़े संघर्ष का गवाह रहा है। डीजीपी तदाशा मिश्रा द्वारा एंटी-नक्सल ऑपरेशन्स की बिंदुवार समीक्षा करना और खुफिया तंत्र को मजबूत करने का निर्देश देना यह दर्शाता है कि पुलिस अब उग्रवाद के खिलाफ एक अंतिम और निर्णायक लड़ाई के मूड में है।
बदलाव की रणनीति: केवल बंदूकों के दम पर नक्सलवाद का खात्मा संभव नहीं है, और पुलिस नेतृत्व इस बात को भली-भांति समझता है। यही कारण है कि डीजीपी ने सर्च ऑपरेशन को तेज करने के साथ-साथ
राज्य सरकार की आत्मसमर्पण नीति के व्यापक प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दिया। यह रणनीति उग्रवाद की जड़ों पर सीधा प्रहार करती है।
आपसी समन्वय: सफलता की कुंजी
इस दौरे की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें स्थानीय पुलिस, जिला पुलिस अधीक्षकों और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के आला अधिकारियों की संयुक्त सहभागिता रही। कोल्हान के दुर्गम जंगलों और पहाड़ों में नक्सलवाद के समूल नाश के लिए स्टेट पुलिस और सेंट्रल फोर्सेज के बीच ऐसा ही मजबूत और सटीक समन्वय अनिवार्य शर्त है।
डीजीपी तदाशा मिश्रा का यह कोल्हान दौरा क्षेत्र के अपराधियों और उग्रवादी संगठनों के लिए एक खुली चेतावनी है, तो दूसरी तरफ कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारियों के लिए एक ऊर्जा बूस्टर। अब दारोमदार फील्ड में तैनात अधिकारियों और जवानों पर है कि वे डीजीपी के इन कड़े और स्पष्ट निर्देशों को धरातल पर कितनी मुस्तैदी से उतारते हैं। कोल्हान की जनता बदलाव और मुकम्मल अमन-चैन की उम्मीद में खाकी के इस नए तेवर को उम्मीद भरी नजरों से देख रही है




