*कोषागार से ‘अवैध निकासी’ रोकने को लेकर चाईबासा में खलबली, मुख्य सचिव के आदेश की अवहेलना पर उठे सवाल
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*भाजपा पिछड़ा जाति मोर्चा ने उपायुक्त को लिखा पत्र; स्वास्थ्य विभाग के ‘पुराने’ बाबुओं और संविदा कर्मियों पर साधा निशाना*
लगाया आरोप जिले मे कुछ खास कुर्सी पर खास लोग क्यों जमे हैं वर्षो से
*चाईबासा। संवाददाता*
झारखंड के विभिन्न जिलों में वेतन मद में हुई वित्तीय अनियमितताओं के बाद अब पश्चिमी सिंहभूम जिला भी सुर्खियों में है। **भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा जाति मोर्चा के प्रदेश मंत्री हेमंत कुमार केशरी** ने उपायुक्त, पश्चिमी सिंहभूम को एक कड़ा पत्र लिखकर जिले के विभिन्न कार्यालयों में वर्षों से जमे लेखा सहायकों, लिपिकों और संविदा कर्मियों के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है।
पत्र में मुख्य सचिव अविनाश कुमार के निर्देशों का हवाला देते हुए जिले में वित्तीय शुचिता सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की गई है।
*क्या है पूरा मामला? (पत्र के मुख्य अंश)**
पत्र के अनुसार, झारखंड वित्त विभाग के **पत्रांक-252 (दिनांक 28.04.2026)** के माध्यम से स्पष्ट आदेश दिया गया था कि जो लेखा सहायक, लेखापाल या लिपिक एक ही कार्यालय में **3 वर्षों से अधिक समय** से पदस्थापित हैं, उनका स्थानांतरण अनिवार्य रूप से किया जाए। इसका उद्देश्य वेतन मद में होने वाली अवैध निकासी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है।
*स्वास्थ्य विभाग और संविदा कर्मियों पर गंभीर आरोप*
उपायुक्त को सौंपे गए इस पत्र में विशेष रूप से **स्वास्थ्य विभाग** की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाई गई है।
*करोड़ों का फंड:** पत्र में उल्लेख है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत केंद्रीय मंत्रालय करोड़ों रुपये भेजता है, जिसमें वित्तीय गड़बड़ी की आशंका बनी रहती है।
*जुगाड़ का खेल:** आरोप लगाया गया है कि स्वास्थ्य विभाग के कई लेखा कर्मी ‘येन-केन-प्रकरेण’ यानी जुगाड़ लगाकर अपना तबादला रुकवाने में सफल रहे हैं।
*नियमों की अनदेखी:** मुख्य सचिव के आदेश के बावजूद संविदा पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को वित्तीय कार्यों से मुक्त नहीं किया गया है, जो कि सीधे तौर पर शासन के निर्देशों की अवहेलना है।
*पत्र में की गई प्रमुख मांगें:**
1. **मुख्य सचिव के आदेश का पालन:* 28 अप्रैल के आदेश के तहत 3 साल से जमे सभी लेखा कर्मियों का अविलंब स्थानांतरण हो।
2. *संविदा कर्मियों पर कार्रवाई:* कंप्यूटर ऑपरेटरों को तत्काल प्रभाव से वित्तीय दायित्वों से हटाया जाए।
3. *सघन जांच * स्वास्थ्य विभाग के लेखा कर्मियों और संविदा ऑपरेटरों के कार्यों की उच्च स्तरीय जांच हो ताकि छिपे हुए तथ्य उजागर हो सकें।
*“चाईबासा कोषागार से पूर्व में भी अवैध निकासी के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में मुख्य सचिव के आदेश का अनुपालन न होना खेद का विषय है। भ्रष्टाचार रोकने के लिए सघन जांच और पारदर्शिता अनिवार्य है।”*— *हेमंत कुमार केशरी, प्रदेश मंत्री, भाजपा पिछड़ा जाति मोर्चा*




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