लातेहार के सरकारी दफ्तरों में जींस-टीशर्ट बैन, वाहनों के दुरुपयोग और प्रोटोकॉल पर भी DC का सख्त पहरा

प्रशासनिक गरिमा सर्वोपरि: लातेहार के सरकारी दफ्तरों में जींस-टीशर्ट बैन, वाहनों के दुरुपयोग और प्रोटोकॉल पर भी DC का सख्त पहरा

लातेहार: जिले के सरकारी महकमों में अब न तो अधिकारियों का ‘कैजुअल लुक’ चलेगा और न ही सरकारी मशीनरी का बेलगाम इस्तेमाल। उपायुक्त (DC) संदीप कुमार ने प्रशासनिक अनुशासन और सरकारी आचार संहिता को कड़ाई से लागू करने के लिए एक बड़ा आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत जहां एक ओर दफ्तरों में जींस, टी-शर्ट समेत सभी कैजुअल कपड़ों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है, वहीं दूसरी ओर सरकारी वाहनों के उपयोग और उनके तय प्रोटोकॉल को लेकर भी कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

​”दफ्तर जनसेवा का केंद्र, फैशन स्टेज नहीं”

​प्रशासनिक मर्यादा को रेखांकित करते हुए उपायुक्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी दफ्तर कोई फैशन स्टेज या मॉल नहीं हैं। यह जनता की सेवा का स्थान है, जहां अनुशासन, शालीनता और गरिमा अनिवार्य है। इसी तरह, सरकारी संसाधन और वाहन लोकहित के लिए हैं, न कि निजी सुविधा के लिए। सिविल सेवा के स्थापित प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए प्रशासन का मानना है कि अनुशासनहीनता और संसाधनों के बेजा इस्तेमाल से आम जनता के बीच सरकार की छवि धूमिल होती है।

​ड्रेस कोड और सरकारी वाहनों के लिए नया प्रोटोकॉल

​प्रशासनिक व्यवस्था में एकरूपता, पारदर्शिता और प्रोफेशनलिज्म बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने दोहरे मोर्चे पर नियम तय किए हैं:

​1. कार्यालय आचार संहिता (ड्रेस कोड)

  • पुरुष अधिकारी/कर्मचारी: केवल फॉर्मल शर्ट-पैंट और फॉर्मल जूते पहनकर ही दफ्तर आ सकेंगे। जींस, टी-शर्ट, स्पोर्ट्स शूज या स्लीपर्स पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे।
  • महिला अधिकारी/कर्मचारी: शालीनता और गरिमा के अनुकूल साड़ी, सलवार-सूट या फॉर्मल वेस्टर्न वियर में ही कार्यालय आ सकेंगी।

​2. सरकारी वाहनों का सख्त प्रोटोकॉल

​सूत्रों की माने तो उपायुक्त ने सरकारी वाहनों की मर्यादा और उनके नियमन को लेकर भी सख्त हिदायत दी है:

  • निजी कार्यों पर रोक: सरकारी वाहनों का उपयोग केवल और केवल आधिकारिक कर्तव्यों, फील्ड विजिट और प्रशासनिक कार्यों के लिए ही किया जाएगा। इनका व्यक्तिगत या पारिवारिक कार्यों में इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।
  • लॉग बुक का संधारण अनिवार्य: सभी सरकारी वाहनों के मूवमेंट को ट्रैक करने के लिए ‘लॉग बुक’ को रोजाना अपडेट करना अनिवार्य कर दिया गया है। वाहन कब, कहाँ और किस सरकारी कार्य से गया, इसका पूरा हिसाब रखना होगा।
  • बोर्ड और नेमप्लेट का दुरुपयोग बंद: जिन अधिकारियों को नियमानुसार वाहन पर सरकारी बोर्ड, पदनाम या नीली/लाल लाइट (प्रोटोकॉल के तहत) लगाने का अधिकार है, केवल वही इसका उपयोग करेंगे। अनधिकृत रूप से या सेवामुक्त/अवकाश के दौरान सरकारी बोर्ड लगाकर घूमना प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना जाएगा।

​आदेश की अवहेलना पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई

​उपायुक्त के इस आदेश को जिला प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। इसे केवल एक सलाह न मानकर आधिकारिक आचार संहिता (Code of Conduct) के रूप में लागू किया गया है।

सख्त निर्देश: जिले के सभी विभागाध्यक्षों (HODs) को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने अधीन कार्यरत कर्मचारियों द्वारा ड्रेस कोड और वाहन प्रोटोकॉल का अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराएं। औचक निरीक्षण के दौरान यदि कोई कर्मी बिना फॉर्मल ड्रेस के मिला या किसी सरकारी वाहन का दुरुपयोग पाया गया, तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ सीधे अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

 

​क्यों जरूरी हुआ यह कड़ा कदम?

​प्रशासनिक जानकारों के मुताबिक, सरकारी व्यवस्था में ‘प्रोटोकॉल’ का पालन ही उसकी रीढ़ होता है।

  1. जवाबदेही और पहचान: फॉर्मल कपड़ों और अनुशासित वाहनों से अधिकारी की एक विशिष्ट और गंभीर पहचान बनती है, जिससे दफ्तर पहुंचने वाले आम ग्रामीणों और फरियादियों में प्रशासन के प्रति विश्वास और सम्मान जगता है।
  2. कार्य संस्कृति और पारदर्शिता: एक जैसी मर्यादित वेशभूषा और वाहनों के पारदर्शी उपयोग से दफ्तर के भीतर का माहौल पूरी तरह प्रोफेशनल बनता है और वित्तीय अनुशासन भी सुनिश्चित होता है।

​लातेहार प्रशासन का यह संयुक्त कदम (ड्रेस कोड और वाहन प्रोटोकॉल) झारखंड के अन्य जिलों के लिए भी प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता और कड़े अनुशासन की एक नई नजीर बन सकता है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे जिले में लागू कर दिया गया है।

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The Voice Live 24x7 संपादक प्रोफाइल जीतेन्द्र ज्योतिषी वर्तमान में the voice के प्रधान सम्पादक के साथ 'झारखंड जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन'के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं..