जहाँ बड़े-बड़े सूरमा ‘लोकतंत्र’ भूल रहे, वहाँ बच्चों ने सिखाया चुनावी पाठ!
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चाईबासा: आज के दौर में जहाँ ‘लोकतंत्र’ शब्द टीवी स्टूडियो की बहसों, चुनावी रैलियों के शोर और सोशल मीडिया की ट्रोल आर्मी के बीच अपनी गरिमा तलाश रहा है, वहीं झारखंड के चाईबासा से लोकतांत्रिक मूल्यों को जिंदा रखने वाली एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है।
पद्मावती जैन सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, चाईबासा में गुरुवार (21 मई 2026) को ‘बाल संसद’ के गठन के लिए चुनाव संपन्न हुए। यह सिर्फ एक स्कूली गतिविधि नहीं थी, बल्कि उन तमाम राजनीतिक दलों और ‘बड़े नेताओं’ के लिए एक व्यावहारिक नसीहत थी, जो चुनाव आते ही लोकतंत्र की परिभाषा बदलने लगते हैं।
चुनावी प्रक्रिया: न बाहुबल, न धनबल; यहाँ चला सिर्फ ‘छात्र बल’
आजकल देश में जब भी चुनाव होते हैं, तो जनता के मुद्दों से ज्यादा चर्चा ईवीएम, दलबदल, रिसॉर्ट पॉलिटिक्स और करोड़ों रुपयों के चुनावी फंड की होती है। लेकिन चाईबासा के इस विद्यालय में नजारा बिल्कुल उलट और पवित्र था।
- नामांकन और निष्पक्ष प्रचार: शिशु, बाल तथा किशोर भारती के ‘सेनापति’ और ‘प्रधानमंत्री’ पद के लिए बाकायदा लोकतांत्रिक तरीके से नामांकन दाखिल किए गए। उम्मीदवारों ने अपनी बात रखी, एजेंडा बताया और गरिमापूर्ण तरीके से प्रचार किया—बिना किसी पर कीचड़ उछाले या ध्रुवीकरण किए!
- वोटिंग की पाठशाला: विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक उमाशंकर पांडे ने बच्चों को मतदान प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। यह जानकारी उन वोटरों के लिए भी जरूरी है जो अक्सर चंद रुपयों या वादों के बदले अपना बहुमूल्य वोट बेच देते हैं।
- अनुशासन का पाठ: प्रधानाचार्य विपिन कुमार दास की देखरेख और विद्यालय के सभी आचार्यों व दीदी जी के सहयोग से यह पूरी प्रक्रिया इतनी शांतिपूर्ण रही कि मुख्यधारा के चुनाव आयोग को भी इससे ‘अनुशासन’ की ट्यूशन लेनी चाहिए।
आज की राजनीति पर एक करारा कटाक्ष
”जब देश की मुख्यधारा की राजनीति में लोकतंत्र केवल भाषणों तक सीमित नजर आने लगा है, जहाँ हारने के बाद विपक्ष ईवीएम को कोसता है और जीतने के बाद सत्ता पक्ष विपक्ष को नजरअंदाज करता है… ऐसे में इन बच्चों का यह प्रयास यह याद दिलाता है कि लोकतंत्र असल में काम कैसे करता है।”
सोचिए, यहाँ न तो किसी उम्मीदवार ने दूसरे पर ‘देशद्रोही’ होने का ठप्पा लगाया, न ही किसी ने मुफ्त की रेवड़ियाँ बांटने का वादा किया। यहाँ मुकाबला सिर्फ इस बात पर था कि विद्यालय और छात्रों के विकास के लिए बेहतर नेतृत्व कौन दे सकता है। काश! हमारे देश के माननीय सांसद और विधायक भी इस ‘बाल संसद’ की मर्यादा से कुछ सीख पाते।
अब सस्पेंस ‘नतीजों’ और ‘गठबंधन’ का!
मुख्यधारा की राजनीति में चुनाव खत्म होते ही विधायकों और सांसदों की ‘बाड़ेबंदी’ (रिसॉर्ट पॉलिटिक्स) शुरू हो जाती है, लेकिन चाईबासा के इस बाल संसद में ऐसा कुछ नहीं होने वाला।
- नतीजे: चुनावी परिणाम कल यानी 22 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे। यहाँ बिना किसी कोर्ट-कचहरी या दोबारा गिनती के विवाद के नतीजों को स्वीकार किया जाएगा।
- शपथ ग्रहण: नवनिर्वाचित सेनापति और प्रधानमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह शनिवार, 23 मई 2026 को होगा। यहाँ कोई ‘जोड़-तोड़’ की सरकार नहीं बनेगी, बल्कि जो जीतेगा वह सेवा की शपथ लेगा।
चाईबासा के इस स्कूल ने यह साबित कर दिया है कि अगर देश के भविष्य (बच्चों) को बचपन से ही लोकतंत्र की सही प्रक्रिया और मर्यादा सिखा दी जाए, तो आने वाले समय में देश की संसद को भी ‘मर्यादित’ होने से कोई नहीं रोक सकता। बशर्ते, हमारे आज के बड़े नेता इन बच्चों के इस प्रयास को देखकर अपनी राजनीतिक शैली पर थोड़ा आत्ममंथन करें!




