हिंदी पत्रकारिता के 200 साल: झारखंड के पत्रकारों की उपेक्षा पर जे जे डब्लू ए ने

हिंदी पत्रकारिता के 200 साल: झारखंड के पत्रकारों की उपेक्षा पर जे जे डब्लू ए ने सीएम को लिखा खुला पत्र

HIGHLIGHTS:

  • 30 मई को हिंदी पत्रकारिता के पूरे हो रहे हैं 200 वर्ष, गरिमापूर्ण आयोजन की मांग।
  • सरकारी कार्यक्रमों से गायब हो रही है ‘प्रेस दीर्घा’, स्वयंभू अधिकारियों का बढ़ा वर्चस्व।
  • झारखंड जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख जताई गहरी चिंता।

रांची:

आगामी 30 मई 2026 को हिंदी पत्रकारिता अपने सफर के गौरवशाली 200 वर्ष पूरे करने जा रही है। इस ऐतिहासिक अवसर पर ‘झारखंड जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन’ के प्रदेश अध्यक्ष जीतेन्द्र ज्योतिषी ने राज्य में पत्रकारों की गिरती स्थिति और प्रशासनिक उपेक्षा को लेकर मुख्यमंत्री को एक खुला पत्र लिखा है। ‘द वॉयस खास’ और ‘अबुआ अखाड़ा’ के माध्यम से जारी इस पत्र में उन्होंने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा बहाली और सूचना तंत्र में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने की पुरजोर मांग की है।

व्यथित मन से मुख्यमंत्री को कड़वे सच से कराया अवगत

​प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र ज्योतिषी ने अपने पत्र में लिखा है कि ‘उदन्त मार्तण्ड’ के प्रकाशन से शुरू हुआ हिंदी पत्रकारिता का यह सफर देश-दुनिया के लिए हर्ष का विषय है। परंतु, आज झारखंड में जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। कई जिलों और विभागों में प्रशासनिक उदासीनता के कारण पत्रकारिता की बुनियाद को दीमक खोखला कर रहे हैं। राज्य में आज पत्रकारिता और पत्रकारों की गरिमा जिस रसातल पर पहुंच चुकी है, वह बेहद चिंताजनक है।

​उन्होंने पत्र के माध्यम से तीन अत्यंत गंभीर बिंदुओं पर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया है:

1. सरकारी कार्यक्रमों में प्रेस की घोर उपेक्षा

​पत्र में आरोप लगाया गया है कि आजकल सरकारी आयोजनों और प्रशासनिक कार्यक्रमों में प्रेस को सम्मानजनक आमंत्रण तो दूर, उचित स्थान तक नहीं दिया जाता। कई महत्वपूर्ण सरकारी बैठकों से प्रेस दीर्घा (Press Gallery) को गायब कर दिया गया है। सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए जो स्थान पत्रकारों का वैधानिक अधिकार था, उसे अधिकारियों की मनमर्जी की भेंट चढ़ा दिया गया है।

2. ‘स्वयंभू अधिकारियों’ का बढ़ता वर्चस्व

​जितेंद्र ज्योतिषी ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जिन्हें पूर्व में केवल सूचना सहयोग, तकनीकी सहायता या फोटोग्राफी आदि के लिए अनुबंधित किया गया था, वे आज स्वयं को ‘स्वयंभू अधिकारी’ मान बैठे हैं। प्रशासनिक बैठकों से पत्रकारों को ‘चलिए हो गया’ जैसे शब्दों से संबोधित कर बाहर कर दिया जाता है, जबकि दूसरी ओर ये अनुबंधित कर्मी बड़े अधिकारियों के समक्ष बैठकर खुद को प्रभावशाली दिखाते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि देश की लोकसभा और विधानसभाओं में आज भी प्रेस दीर्घा का गौरवपूर्ण अस्तित्व कायम है।

3. जिलों में ‘पोस्ट ऑफिस’ बनकर रह गई है प्रेस

​झारखंड के कई जिलों में संबंधित विभागों द्वारा प्रेस को महज एक ‘खानापूर्ति’ का जरिया बना दिया गया है। पत्रकारों से केवल सरकारी प्रेस विज्ञप्तियों को बिना किसी सवाल के आगे फॉरवर्ड करने की अपेक्षा की जाती है। खोजी पत्रकारिता करने वाले, जनहित के सवाल उठाने वाले और प्रशासनिक कमियों को उजागर करने वाले पत्रकारों को जानबूझकर नजरअंदाज और प्रताड़ित किया जा रहा है, जिससे स्वतंत्र प्रेस के वजूद पर खतरा मंडराने लगा है।

ऐतिहासिक अवसर पर झारखंड सरकार से तीन मुख्य मांगें:

​हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

    • राज्य स्तरीय गरिमापूर्ण आयोजन: 200वीं वर्षगांठ पर राज्य सरकार द्वारा एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाए, जिसमें वरिष्ठ, ईमानदार और ग्रामीण क्षेत्रों में संघर्ष कर रहे पत्रकारों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाए।
    • प्रेस दीर्घा की अनिवार्य बहाली: सभी सरकारी व प्रशासनिक कार्यक्रमों में प्रेस दीर्घा को अनिवार्य रूप से बहाल किया जाए और पत्रकारों के सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
    • अधिकारियों की जवाबदेही: सूचना तंत्र को बंधक बनाकर रखने वाले ‘स्वयंभू अधिकारियों’ पर तत्काल लगाम कसी जाए, ताकि सरकार और प्रेस के बीच का संवाद पारदर्शी हो सके।

“प्रेस की स्वतंत्रता और सम्मान के बिना एक मजबूत लोकतंत्र की कल्पना असंभव है। आशा है कि मुख्यमंत्री इस खुले पत्र का संज्ञान लेते हुए झारखंड के पत्रकार जगत को उनका खोया हुआ सम्मान वापस लौटाएंगे।”

— जीतेन्द्र ज्योतिषी, प्रदेश अध्यक्ष, झारखंड जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन

 

Tags: #JharkhandNews #HindiJournalism200Years #JitendraJyotishi #JJWA #JharkhandJournalists #CMOJharkhand #PressFreedom

The Voice Live 24x7

The Voice Live 24x7 संपादक प्रोफाइल जीतेन्द्र ज्योतिषी वर्तमान में the voice के प्रधान सम्पादक के साथ 'झारखंड जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन'के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं..