रांची: झारखंड के अलग राज्य निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले आंदोलनकारी अब अपनी अस्मिता और हक की लड़ाई के लिए सड़क पर उतर आए हैं। बुधवार को ‘झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा’ के बैनर तले राज्य भर से हजारों की संख्या में आंदोलनकारी रांची पहुंचे और मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए मोरहाबादी मैदान से कूच किया।
दमनकारी सुरक्षा घेरा, पर कम नहीं हुआ हौसला
आंदोलनकारियों के प्रस्तावित घेराव कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की थी। मोरहाबादी मैदान से लेकर मुख्यमंत्री आवास तक सुरक्षा का अभेद्य किला तैयार कर दिया गया था।
- भारी पुलिस बल: रैपिड एक्शन पुलिस, एसआईआरबी, जैप और इको बल समेत करीब 600 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया।
- बैरिकेडिंग और वज्र वाहन: शहर के प्रमुख मार्गों पर जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई। आंसू गैस स्क्वॉड, फायर ब्रिगेड और ब्रज वाहनों की तैनाती के जरिए आंदोलनकारियों को रोकने की पूरी कोशिश की गई।
- ट्रैफिक डायवर्जन: प्रदर्शन के कारण शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही और प्रशासन को कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा।
- पुष्कर महतो की दो टूक: “सम्मान नहीं, तो संघर्ष जारी”

प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए ‘झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा’ के नेता पुष्कर महतो ने सरकार को सीधे चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, “झारखंड अलग राज्य के सपने को साकार करने वाले आंदोलनकारियों को आज अपनी ही सरकार में दर-दर भटकना पड़ रहा है। हमारी पहचान, अस्मिता और पेंशन जैसी वाजिब मांगों को अब और अनदेखा नहीं किया जाएगा। सरकार को झारखंड के आंदोलनकारियों को समुचित सम्मान देना ही होगा।”
आंदोलनकारियों का आक्रोश
मोरहाबादी मैदान से मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ते आंदोलनकारियों के हाथों में बैनर और जुबान पर सरकार विरोधी नारे थे। वर्षों से लंबित अपनी मांगों को लेकर आंदोलनकारियों में गहरा आक्रोश है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, यह संघर्ष और तेज होगा।
वर्तमान में, प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच तनातनी बनी हुई है। सरकार द्वारा आंदोलनकारियों की सुध कब ली जाती है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।



