चाईबासा-खूंटी को जोड़ने वाली सड़क पर एक साल टूटी पड़ी हैं!पुलिया
चाईबासा: पश्चिम सिंहभूम के गुदड़ी प्रखंड और खूंटी जिले के रनिया प्रखंड को जोड़ने वाली मुख्य सड़क जरागुटु गांव के पास बीते एक वर्ष से बदहाल है। पिछले साल हुई भारी बारिश में यहां का पुलिया पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद से आज तक प्रशासन से जुड़े संबंधित विभाग ने इसकी सुध नहीं ली है।

विकास के बड़े-बड़े दावों और प्रशासनिक दावों के बीच, स्थानीय ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर बांस-लकड़ी से बने अस्थायी ‘चचरी पुल’ के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं।
जानलेवा सफर, हर पल दुर्घटना का डर
जरागुटु गांव के पास बना यह अस्थायी चचरी पुल किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है। ग्रामीण अपनी जान हथेली पर रखकर साइकिल और मोटरसाइकिल लेकर इस पुल को पार करते हैं।
- आवागमन बाधित: चार पहिया वाहनों का गुजरना पूरी तरह बंद।
- छात्रों और मरीजों की समस्या: स्कूली बच्चों और आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए लंबी दूरी तय करने की मजबूरी।
- सुरक्षा का अभाव: बरसात के मौसम में यह मार्ग और भी खतरनाक हो जाता है, जहां मामूली चूक भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति आक्रोश
लगातार एक वर्ष बीत जाने के बाद भी पुलिया का निर्माण कार्य शुरू न होने से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन और क्षेत्र के जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज कर रहे हैं।
”एक साल बीत जाने के बाद भी यहां नया पुल नहीं बन पाया है। हमने अपनी सुरक्षा के लिए बांस-लकड़ी का चचरी पुल बनाया है, लेकिन उस पर भी बाइक ले जाना खतरनाक है। हम लोग कब तक ऐसे ही अपनी जान जोखिम में डालते रहेंगे?”
— नयमन सुरीन, ग्रामीण
विकास की योजनाओं की घोषणाओं के बीच, जरागुटु के ग्रामीणों का यह संघर्ष आईना दिखाता है कि जमीनी स्तर पर विभागीय सुस्ती किस कदर हावी है। एक साल का समय किसी भी तकनीकी जटिलता को सुलझाने के लिए पर्याप्त होता है, लेकिन एक पुलिया का निर्माण न हो पाना विभागीय कार्यशैली पर एक गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है।



