द वॉइस लाइव 24×7′ की मुहिम: अब सियासत की सीढ़ी नहीं, संघर्ष का सम्मान होगा!

  1. द वॉइस लाइव 24×7′ की मुहिम: अब सियासत की सीढ़ी नहीं, संघर्ष का सम्मान होगा!

लेखक: द वॉइस लाइव 24×7 डेस्क

​आजादी के 78 वर्षों में भारतीय राजनीति ने व्यापक बदलाव देखे हैं। इस दौरान न जाने कितने राजनीतिक दलों का उदय और सूर्यास्त हुआ, लेकिन इन दलों की रीढ़ हमेशा उनके ‘जुझारू कार्यकर्ता’ रहे हैं। इन्हीं कार्यकर्ताओं के निस्वार्थ संघर्ष के सहारे आज के कई बड़े नेता ‘जीरो से हीरो’ बने और सत्ता के सिरमौर कहलाए।

​संघर्ष की दास्तान और सत्ता का विद्रूप चेहरा

​विडंबना देखिए, जो नेता कभी संसाधनों के अभाव में थे, वे आज सत्ता के बेताज बादशाह बनकर आलीशान जीवन जी रहे हैं। जिनके पास कभी पहनने को चप्पल नहीं थी, आज उनकी राजनीतिक पत्नियां लाखों की चप्पल और सूट पहनती हैं, जबकि जिस कार्यकर्ता ने उन्हें वहाँ तक पहुँचाया, वह आज भी उपेक्षित है।

  • उपेक्षा का दंश: सत्ता मिलते ही नेता का दरवाज़ा कार्यकर्ता के लिए बंद हो जाता है, जहाँ उसे घंटो इंतज़ार करना पड़ता है।
  • अधिकारियों/पदाधिकारी यों का रवैया: अफसर और पदाधिकारी जनता और कार्यकर्ताओं के काम के बजाय केवल सत्ता के गलियारों में नेताओं की सेवा में व्यस्त रहते हैं। वे कार्यकर्ताओं को केवल ‘भीड़’ मानकर पीछे धकेल देते हैं।
  • आर्थिक शोषण: सरकार बनने के बाद भी कार्यकर्ताओं को किसी स्थायी लाभ की योजना का लाभ नहीं मिलता। सरकारी टेंडर और ठेकों में भी उन्हें कमीशन के चक्रव्यूह से जूझना ही पड़ता है।

​एक बदलाव की दस्तक: रानी ठाकुर और सम्मान की नई नजीर

​राजनीति में अब तक केवल ‘नेतृत्व पूजन’ हावी रहा है, लेकिन हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के झारखण्ड दौरे ने एक सुखद संदेश दिया है। इस यात्रा की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि यहाँ स्थापित नेताओं के साथ-साथ साधारण कार्यकर्ताओं को भी बराबर का मान-सम्मान मिला।

​इस दौरान जमशेदपुर की वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता रानी ठाकुर को राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यक्रम में जो सम्मान प्राप्त हुआ, वह पूरे संगठन के लिए एक मिसाल है। रानी ठाकुर जैसे जमीनी स्तर के कार्यकर्ता, जिन्होंने वर्षों से पार्टी को अपना सर्वस्व दिया है, जब शीर्ष नेतृत्व से सम्मान पाते हैं, तो वह पूरे कार्यकर्ता वर्ग का सम्मान होता है। यह घटना दर्शाती है कि राजनीति में ‘कार्य पूजन’ की शुरुआत की जा सकती है, यदि नेतृत्व का दृष्टिकोण पारदर्शी हो।

​’द वॉइस लाइव 24×7′ की विशेष पहल

​सवाल यह है कि सत्ता के लिए संघर्षरत अन्य राजनीतिक दल क्या कार्यकर्ताओं को ऐसा स्थायी सम्मान और पहचान देने का साहस दिखा पाएंगे? क्या कार्यकर्ता केवल सत्ता की सीढ़ी पकड़ने वाला सहयोगी भर रहेगा?

​हमारा मानना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए ‘नेतृत्व पूजन’ की प्रक्रिया के बीच ‘कार्य पूजन’ को स्थान मिलना अनिवार्य है। इसी उद्देश्य के साथ, ‘द वॉइस लाइव 24×7’ अब प्रत्येक रविवार एक विशेष श्रृंखला शुरू कर रहा है। इसमें हम रानी ठाकुर जैसे विभिन्न राजनीतिक दलों के उन कर्मठ और जुझारू कार्यकर्ताओं के संघर्ष की गाथा को प्रमुखता देंगे, जिन्होंने गुमनामी में रहकर भी लोकतंत्र की लौ को जलाए रखा है।

जुड़े रहिए हमारे साथ, क्योंकि कार्यकर्ता ही लोकतंत्र की असली धड़कन है।

क्या आप भी किसी ऐसे कार्यकर्ता को जानते हैं जिन्होंने अपने संघर्ष से राजनीति की तस्वीर बदली है? हमें बताएं, हम आपकी आवाज़ बनेंगे।

The Voice Live 24x7

The Voice Live 24x7 संपादक प्रोफाइल जीतेन्द्र ज्योतिषी वर्तमान में the voice के प्रधान सम्पादक के साथ 'झारखंड जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन'के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं..