The वॉयस खास | अबुआ अखाडा: सीरीज – पहली कड़ी
अब जरूरत सारंडा को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की: करोड़ों बहे, फिर भी विकास प्यासा!
चाईबासा / पश्चिमी सिंहभूम।
गुरुवार, 21 मई 2026
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित सारंडा वन क्षेत्र… लगभग 840 वर्ग मील में फैला एशिया का सबसे घना साल का जंगल। यह क्षेत्र न केवल अपनी समृद्ध जैव-विविधता और सिंहभूम हाथी आरक्षित क्षेत्र के लिए जाना जाता है, बल्कि यह भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क भंडारों (2,000 मिलियन टन से अधिक) के ऊपर बैठा है।
लेकिन इस अकूत प्राकृतिक संपदा के बीच रहने वाली स्थानीय जनजातीय आबादी, विशेष रूप से ‘हो’ और ‘बिरहोर’ जैसे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG), राज्य गठन के ढाई दशक बाद भी आज तक विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर हैं। ऐतिहासिक रूप से भौगोलिक दुर्गमता, प्रशासनिक शून्यता और घोर आर्थिक उपेक्षा का शिकार रहा यह क्षेत्र आज भी बुनियादी हकों के लिए तरस रहा है।
जब सारंडा के आसमान पर उमड़े थे ‘बदलाव के बादल’
एक दौर था जब तत्कालीन केंद्र सरकार ने इस संवेदनशील और उपेक्षित वन क्षेत्र के विकास के लिए कमर कसी थी। यहाँ ‘सारंडा एक्शन प्लान’ की शुरुआत हुई। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश (जो स्थानीय लोगों के बीच ‘जय राम मुंडा’ के नाम से चर्चित हो गए) के कई चाईबासा दौरे हुए। अ-विकसित सारंडा के आसमान पर बदलाव के बादल ऐसे उमड़े, मानो अब बरसे तो विकास की हरियाली आ ही जाएगी!
“बादल बरसे भी, पर विकास का चेक डैम सही नहीं था!”
सन 2014 के बाद यहाँ हालात और भी बदतर हो गए। ‘कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा’ जोड़कर योजनाएं तैयार की गईं। आलम यह हुआ कि:
- सड़कों का अता-पता नहीं: कागजों पर सड़कें बनीं, पर हकीकत में ‘कहीं की सड़क कहीं और’ ही नजर आई।
- ट्रेनिंग के नाम पर मज़ाक: स्थानीय युवाओं की बेरोजगारी दूर करने के लिए प्रशिक्षण का जिम्मा ऐसी संस्थाओं (NGOs) को दे दिया गया, जो खुद ही प्रशिक्षित नहीं थीं और जिन्हें प्रशिक्षण देना आता ही नहीं था।
चुनावी घोषणाएं हुईं कि ‘सारंडा एक्शन प्लान’ के एक-एक पैसे का हिसाब लिया जाएगा। सूबे में नई सरकारें बनीं, फिर भी बात नहीं बनी। घनघोर विकास के बादलों का पानी रुका नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के रास्ते बह गया! पानी की नमी से थोड़े दिन हरियाली तो रही, परन्तु बाद में कागजों में ‘विकसित’ कही जाने वाली धरती पर फिर से सुखाड़ आ गया।
झूठे ‘विकास के प्रेशर कुकर’ में क्यों नहीं पक रही डेवलपमेंट की खिचड़ी?
आज, ‘अबुआ अखाडा’ की इस नई सीरीज में हम इसी कड़वे सच को ढूंढने और उजागर करने का प्रयास कर रहे हैं कि विकास कार्यों का जो अरबों रुपया और योजनाएं यहाँ भेजी गईं, उनका लाभ धरातल पर जनमानस को क्यों नहीं मिला?
आज पहली कड़ी में राजनीतिक दावों और ज़मीनी हकीकत का विश्लेषण करते हैं:
- मँझगांव विधानसभा की लचर व्यवस्था: आज ही भाजपा नेता ने पश्चिमी सिंहभूम की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए मँझगांव विधानसभा की बदहाली का हवाला दिया। लेकिन सच यह है कि ऐसी व्यवस्था कोई आज या कल में नहीं पनपी है। यह बदतर स्थिति पूर्ववर्ती भाजपा सरकारों के दौर में भी वैसी ही रही है।
- NGOs की चांदी, बच्चों के हाथ खाली: साल 2015 से लेकर 2022 तक सारंडा में तत्कालीन सरकारों ने कुछ स्वयं सेवी संस्थानों (NGOs) को बड़ी निधि और खुली छूट के साथ दूरस्थ गांवों में रहने वाले जनजातीय बच्चों के शिक्षण कार्य का जिम्मा दिया था। धरातल का सच आज ज़मीन पर गवाही दे रहा है—स्वयं सेवी संगठन तो भारी आर्थिक फायदे में रहे, पर बच्चों को शिक्षा का वह अधिकार और फायदा नहीं मिला जिसके वे हकदार थे।
- कागजों में सिमटे ‘आश्रम स्कूल’: जनजातीय बच्चों को निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के उद्देश्य से 10 आवासीय ‘आश्रम स्कूलों’ की स्थापना की परिकल्पना की गई थी। लेकिन प्रशासनिक अक्षमता और बजटीय विसंगतियों का बहाना बनाकर स्थानीय प्रशासन ने इसमें भारी कटौती कर दी। यह कटौती उस क्षेत्र के नौनिहालों के लिए अत्यंत आत्मघाती साबित हुई, जहाँ साक्षरता दर और बुनियादी अंकगणितीय ज्ञान का स्तर राष्ट्रीय औसत से पहले ही अत्यंत नीचे है।
‘अबुआ अखाडा’ के सुलगते सवाल:
- प्रतिनिधियों के विकास वाले ‘प्रेशर कुकर’ में सारंडा के डेवलपमेंट की खिचड़ी आखिर क्यों नहीं पक रही?
- करोड़ों रुपये की लागत से बने ‘इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट सेंटर’ (IDC) आज सफेद हाथी बनकर क्यों खड़े हैं, वे लोगों का विकास क्यों नहीं कर पाए?
- केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा पैसों की गंगा बहाने के बाद भी, सारंडा के आदिवासियों के कंठ सूखे क्यों हैं? उनके नसीब में पीने का साफ पानी तक क्यों नहीं है?
इन सभी सवालों के जवाब और सारंडा के अंदरूनी इलाकों की परत-दर-परत हकीकत लेकर हम लौटेंगे इस सीरीज की अगली कड़ी में… क्रमशः
रिपोर्टर:
जितेन्द्र ज्योतिषी
(अध्यक्ष – झारखंड जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन)
The वॉयस खास (अबुआ अखाडा)
The Voice Live 24×7 वेब साईट के लिए विशेष श्रृंखला
#SarandaActionPlan #AbuaAkhada #TheVoiceLive24x7 #JharkhandCorruption #WestSinghbhum #JitendraJyotishi #TribalEducation #SarandaForest #JharkhandNews



