प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में महाघोटाले का आरोप: रांची के किसानों ने खोला मोर्चा, उच्चस्तरीय जांच की मांग
रांची: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ (PMKSY/PMDC) में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। रांची जिले के किसानों ने इस योजना में सरकारी राशि की बंदरबांट और निजी कंपनियों के साथ मिलीभगत का सनसनीखेज आरोप लगाते हुए उपायुक्त को पत्र सौंपा है। इस शिकायत के बाद कृषि विभाग के गलियारों में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
किसानों के एक समूह ने लिखित शिकायत में आरोप लगाया है कि कृषि विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और चुनिंदा निजी कंपनियों के बीच एक गठजोड़ काम कर रहा है। आरोप है कि योजना की राशि का उपयोग वास्तविक और जरूरतमंद किसानों तक पहुँचने के बजाय, कंपनियों और विभाग की सांठ-गांठ से निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए किया जा रहा है।

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शिकायत के मुख्य बिंदु:
- अपात्रों को लाभ: वास्तविक लाभुकों को दरकिनार कर निजी कंपनियों द्वारा अपने चहेते लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।
- घटिया सामग्री: शिकायत के अनुसार, जिन कंपनियों को ‘सिपेट’ (CIPET) की जांच में घटिया सामग्री आपूर्ति का दोषी पाया गया था, उन्हें भी विभाग द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से काम आवंटित किया जा रहा है।
- जीएसटी घोटाला: पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि निजी कंपनियों द्वारा सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाते हुए जीएसटी (GST) राशि में भी बड़ा घोटाला किया जा रहा है, जिसमें विभागीय अधिकारियों की प्रत्यक्ष संलिप्तता है।
- गुणवत्ता में धांधली: मानकों के विपरीत घटिया सामग्री की आपूर्ति कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है।
किसानों की मांग: ‘राज्यव्यापी जांच की आवश्यकता’
रांची के किसानों ने अब इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय कमेटी गठित कर जांच करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यह केवल रांची का मामला नहीं है, बल्कि राज्य के अन्य जिलों में भी इसी तरह की अनियमितताओं की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
जिम्मेदार कौन?
सवाल उठता है कि जब कंपनियों को घटिया सामग्री के लिए दोषी पाया, तो फिर विभागीय अधिकारियों ने उन्हें काम कैसे आवंटित किया? क्या यह एक बड़े रैकेट का हिस्सा है, जो राज्य के किसानों के हक पर डाका डाल रहा है?



