हिमाचल की ‘सांचा विद्या’ अब वैश्विक मंच पर: डॉ. देवकन्या ठाकुर की फिल्म ‘मैं हूँ पाबुच’ का 16 जून को होगा प्रीमियर

हिमाचल की ‘सांचा विद्या’ अब वैश्विक मंच पर: डॉ. देवकन्या ठाकुर की फिल्म ‘मैं हूँ पाबुच’ का 16 जून को होगा प्रीमियर

शिमला: हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी पहचान मिली है। प्रख्यात फिल्मकार डॉ. देवकन्या ठाकुर द्वारा निर्देशित वृत्तचित्र “मैं हूँ पाबुच” का चयन प्रतिष्ठित 19वें मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) 2026 के ‘प्रिज़्म सेक्शन’ के लिए किया गया है। इस फिल्म का बहुप्रतीक्षित प्रीमियर आगामी 16 जून को मुंबई में होगा।

​क्या है ‘मैं हूँ पाबुच’ की कहानी?

​यह वृत्तचित्र सिरमौर जिले के खड़काहन गांव में रहने वाले ‘पाबुच ब्राह्मण’ समुदाय की लुप्तप्राय होती सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहर का एक जीवंत दस्तावेज है। फिल्म इस बात को रेखांकित करती है कि कैसे आधुनिकता के इस दौर में भी यह समुदाय अपनी प्राचीन ज्ञान-परंपरा को संजोए हुए है।

​’सांचा विद्या’ और कश्मीर से जुड़ाव

​फिल्म का मुख्य केंद्र बिंदु “सांचा विद्या” है। माना जाता है कि इस परंपरा की जड़ें प्राचीन कश्मीर की ‘शारदा ज्ञान-संस्कृति’ से जुड़ी हैं। पाबुच ब्राह्मण समुदाय आज भी इस विद्या के जरिए जीवन, समाज और प्रकृति से जुड़े रहस्यों और समाधानों को साझा करता है।

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​इस वृत्तचित्र की प्रमुख विशेषताएं:

  • पांडुलिपियों का संरक्षण: फिल्म में 15वीं शताब्दी से संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों और उनके पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरण की प्रक्रिया को दिखाया गया है।
  • जीवंत ज्ञान: यह फिल्म साबित करती है कि ज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोक-स्मृति, अभ्यास और सामूहिक चेतना में भी सुरक्षित रहता है।
  • स्वदेशी ज्ञान प्रणाली: यह फिल्म भारत की उन स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों का सशक्त आख्यान है, जो सदियों से हिमालयी भूगोल में रची-बसी हैं।

​हिमालयी ज्ञान परंपरा की वैश्विक स्वीकृति

​मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) का ‘प्रिज़्म सेक्शन’ विश्वभर की उन चुनिंदा फिल्मों को जगह देता है, जो अपनी सिनेमाई संवेदनशीलता और अनूठे विषय के लिए जानी जाती हैं।

​डॉ. देवकन्या ठाकुर की यह फिल्म न केवल हिमाचल की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करती है, बल्कि यह भी बताती है कि हिमालय की दुर्गम घाटियों में सांस ले रही ये ज्ञान-परंपराएं भविष्य के लिए एक सांस्कृतिक मार्गदर्शक (Cultural Guide) का काम कर सकती हैं। यह उपलब्धि हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का विषय है, जो स्थानीय लोक-संस्कृति को एक व्यापक वैश्विक मंच प्रदान कर रही है।

The Voice Live 24x7

The Voice Live 24x7 संपादक प्रोफाइल जीतेन्द्र ज्योतिषी वर्तमान में the voice के प्रधान सम्पादक के साथ 'झारखंड जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन'के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं..