बांग्ला भाषा को नई पहचान दे रही ‘अपुर पाठशाला’

 स्थापना के दो साल पूरे, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर

रांची/हटिया: सिंह मोड़, विकासनगर स्थित ‘आपनजन बंगाली संगठन’ द्वारा संचालित बांग्ला भाषा शिक्षण केंद्र ‘अपुर पाठशाला’ ने अपनी स्थापना के दो सफल वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस उपलब्धि पर संगठन द्वारा एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें भाषा के प्रति लोगों के बढ़ते लगाव और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया।

​सांस्कृतिक विरासत और मातृभाषा का अटूट संबंध

​समारोह के दौरान ‘आपनजन बंगाली संगठन’ के अध्यक्ष रमेश चंद्र सरकार ने कहा कि किसी भी समाज की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने के लिए अपनी मातृभाषा से जुड़ाव अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा, “अपनी मातृभाषा के प्रति प्रेम ही हमें अपनी माटी और जड़ों से जोड़कर रखता है।”

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​भाषा सीखने वालों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि

​संगठन के सचिव जगत ज्योति राय ने इस अवसर पर उत्साहजनक आंकड़े साझा करते हुए बताया कि बांग्ला भाषा के प्रति न केवल बंगाली समुदाय, बल्कि अन्य भाषा-भाषी लोगों में भी भारी आकर्षण देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा, “अपुर पाठशाला में बांग्ला भाषा सीखने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। भाषा के संरक्षण और संवर्द्धन के माध्यम से ही हम अपनी सांस्कृतिक पहचान को आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत बना सकते हैं।”

​बच्चों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

​द्वितीय वर्षगांठ के इस उत्सव को छात्रों, शिक्षकों और क्लब के सदस्यों ने यादगार बना दिया। स्कूली छात्रों ने बांग्ला कविताओं, राइम्स और संगीतमय प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी भाषाई दक्षता का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में तन्मय मुखर्जी सहित ‘आपनजन बंगाली संगठन’ के कई गणमान्य सदस्य और स्थानीय लोग उपस्थित थे।

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The Voice Live 24x7 संपादक प्रोफाइल जीतेन्द्र ज्योतिषी वर्तमान में the voice के प्रधान सम्पादक के साथ 'झारखंड जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन'के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं..