दिल्ली में केंद्रीय कृषि बैठक में उठाए गये किसानों के अहम मुद्दे
नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित राज्यों के कृषि मंत्रियों की समीक्षा बैठक में झारखंड ने अपनी कृषि प्राथमिकताओं को मजबूती से रखा है। राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बैठक में हिस्सा लिया और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच राज्य की तैयारी और किसानों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की।
जलवायु परिवर्तन के अनुरूप खेती ही भविष्य: शिल्पी नेहा तिर्की
बैठक के दौरान राज्य की कृषि मंत्री ने जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को देखते हुए ‘जलवायु-अनुकूल खेती’ (Climate-Resilient Agriculture) को प्रमुखता दी। उन्होंने कहा कि झारखंड में अब किसान मौसम की अनिश्चितता के अनुसार खेती करने के लिए प्रेरित किए जा रहे हैं। राज्य सरकार किसानों को मक्का और दलहन जैसी फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है ताकि मौसम की मार के बावजूद उनकी आय स्थिर और सुरक्षित बनी रहे।
इसके अतिरिक्त, किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए कृषि के साथ-साथ पशुपालन, मशरूम उत्पादन, लाख की खेती और मत्स्य पालन जैसे वैकल्पिक आजीविका साधनों पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
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उर्वरक आपूर्ति में कमी पर जताई चिंता
बैठक में झारखंड सरकार ने उर्वरक की उपलब्धता का गंभीर मुद्दा उठाया। राज्य ने केंद्र से 3 लाख 90 हजार मीट्रिक टन उर्वरक की मांग की थी, जिसके मुकाबले मात्र 3 लाख 20 हजार मीट्रिक टन की ही स्वीकृति मिली है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि कृषि के मुख्य सीजन में किसानों को खाद के लिए किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए समय पर पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना आवश्यक है।
मानसून की सुस्ती और टिड्डी हमले को लेकर अलर्ट
- बैठक में राज्य में मानसून की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई। आंकड़ों के अनुसार, 17 जून तक सामान्य वर्षा के मुकाबले राज्य में लगभग 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। राज्य के अधिकांश प्रखंडों में बारिश की कमी से किसान चिंतित हैं, हालांकि मौसम विभाग ने आगामी दिनों में स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई है।

इसके साथ ही, संभावित टिड्डी हमले को देखते हुए भी झारखंड सरकार पूरी तरह सतर्क है। मंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में इसके लिए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। संवेदनशील जिलों की पहचान की गई है और कृषि कार्यशालाओं के माध्यम से किसानों को जागरूक किया जा रहा है। केंद्र सरकार से संभावित प्रभावित किसानों के लिए राहत पैकेज की भी मांग की गई है।



