आस्था और भक्ति से गूंजा पश्चिम सिंहभूम
चाईबासा/हरिणा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के हरिणा गाँव स्थित प्रसिद्ध महातीर्थ मुक्तेश्वर धाम में सात दिवसीय वार्षिक मेले एवं धार्मिक उत्सव का भव्य शुभारंभ हो गया है। ज्येष्ठ संक्रांति (राजा पर्व) के पावन अवसर पर 15 जून से शुरू हुए इस आयोजन ने पूरे क्षेत्र को भक्ति के रंग में सराबोर कर दिया है।
400 वर्षों की अटूट आस्था
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मुक्तेश्वर धाम की महिमा लगभग 400 वर्ष पुरानी है। कहा जाता है कि भगवान शिव यहाँ एक गाय के माध्यम से स्वयं प्रकट हुए थे। तब से यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। आज यह धाम न केवल झारखंड, बल्कि पड़ोसी राज्यों—पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार के श्रद्धालुओं के लिए भी एक प्रमुख शिव तीर्थ के रूप में स्थापित हो चुका है।

पारंपरिक रीति-रिवाजों से हुआ उत्सव का आरंभ
उत्सव की औपचारिक शुरुआत 14 जून की रात से ही हो गई थी। बाबा मुक्तेश्वर की आराधना के साथ पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान, आम डाली, जाम डाली और मनमोहक छऊ नृत्य ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। 15 जून की सुबह ज्येष्ठ संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भोक्ता तालाब में पवित्र स्नान और धार्मिक अनुष्ठान किए। इसके बाद “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष के साथ मंदिर परिसर भगवान शिव के नारों से गूंज उठा।
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भक्ति और उल्लास का संगम
इस अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तों ने कठिन ‘दंडी व्रत’ का पालन कर अपनी श्रद्धा निवेदित की। मेले की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ पूजा-अर्चना के साथ-साथ खरीदारी, स्थानीय खान-पान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी विशेष प्रबंध है।
- प्रमुख आकर्षण:
- भोक्ता तालाब में विशेष धार्मिक अनुष्ठान।
- पारंपरिक छऊ नृत्य और जागरण।
- विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति।
- मनोरंजन और स्थानीय हस्तशिल्प की दुकानें।
आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक
आज हरिणा का महातीर्थ मुक्तेश्वर धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि इस अंचल की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का मुख्य स्तंभ बन चुका है। श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि बाबा मुक्तेश्वर के दरबार में आने वाले हर भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि समय के साथ मेले का स्वरूप विस्तृत होने के बावजूद यहाँ आने वाले भक्तों की संख्या और आस्था में निरंतर वृद्धि हो रही है।
सात दिनों तक चलने वाला यह धार्मिक उत्सव क्षेत्र में भाईचारे और अध्यात्म का संदेश फैला रहा है। यदि आप भी शांति और ईश्वरीय कृपा की तलाश में हैं, तो हरिणा का यह मुक्तेश्वर धाम निश्चित रूप से एक बार दर्शन करने योग्य स्थान है।



