80 साल पुराने चाइबासा सीमेंट वर्क्स को बंद कर 1600 परिवारों को सड़क पर लाने की तैयारी, 
चाईबासा :-एशिया के सबसे पुराने औद्योगिक प्रतिष्ठानों में शुमार ‘चाइबासा सीमेंट वर्क्स’ पर अब ताला लगाने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है। 16 अगस्त 2026 से कारखाने को बंद करने और 1600 कर्मचारियों को सड़क पर लाने का प्रबंधन का फरमान क्षेत्र में बारूद के ढेर पर चिंगारी जैसा है। सवाल यह है कि जिस कारखाने के पास पर्याप्त खनिज संपदा मौजूद है, उसे जबरन ‘घाटे’ का नाम देकर बंद क्यों किया जा रहा है?
प्रबंधन के दावों पर सवालिया निशान:
प्रबंधन का कहना है कि चूना पत्थर (लाइमस्टोन) खत्म हो चुका है, लेकिन दस्तावेज़ कुछ और ही गवाही दे रहे हैं। जबकी स्थानीय कर्मचारी और ग्रामीणों का कहना हैं की जो कम्पनी द्वारा बोला जा रहा हैं वो सच नहीं हैं..
- खनन लीज का सच: कारखाने के पास F3 भाग में 30 वर्षों की वैध खनन लीज मौजूद है। GSI और IBM की आधिकारिक रिपोर्टें इस बात की पुष्टि करती हैं कि यहाँ चूना पत्थर का पर्याप्त भंडार है। फिर प्रबंधन झूठ क्यों बोल रहा है?
- निवेश की कमी: पिछले कुछ वर्षों में प्रबंधन ने संयंत्र के आधुनिकीकरण में कोई रुचि नहीं दिखाई। यह ‘जानबूझकर’ की गई कोताही है ताकि कारखाने को अव्यवहार्य (Unviable) घोषित किया जा सके।
आदिवासी क्षेत्र की रोजगार की रीढ़ तोड़ने की कोशिश:
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यह संयंत्र ‘पांचवीं अनुसूची’ (5th Schedule) क्षेत्र में स्थित है, जो स्थानीय निवासियों और आदिवासियों के लिए आर्थिक सुरक्षा का एकमात्र आधार है। इस कारखाने के बंद होने का मतलब है—1600 परिवारों की रोजी-रोटी का छिन जाना और पूरे क्षेत्र में भुखमरी व पलायन का न्योता देना। प्रबंधन का यह कदम न केवल जनविरोधी है, बल्कि यह संवैधानिक अधिकारों का भी उल्लंघन है।
स्थानीय कर्मचारियों की ललकार—”आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार
ए सी सी झींकपानी के कर्मचारियों/मजदूरो ने कम्पनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि यह षड्यंत्रकारी बंदी नहीं रुकी, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। कर्मचारियों ने सरकार से सवाल किया है कि क्या राज्य की संपदा को निजी स्वार्थ के लिए नष्ट होने दिया जाएगा?
कर्मचारी और मजदूरों की मुख्य मांगें:
- प्रबंधन द्वारा जारी ‘नोटिस ऑफ क्लोजर’ को अविलंब निरस्त किया जाए।
- खनिज भंडार की स्वतंत्र जांच कराई जाए और प्रबंधन की मिलीभगत का खुलासा हो।
- सरकार हस्तक्षेप कर कारखाने के आधुनिकीकरण और भविष्य सुरक्षित करे।



