शिक्षा और सेवा ही सामाजिक नवनिर्माण का आधार: उषा पोद्दार

रांची। राजधानी रांची के हरमू हाउसिंग कॉलोनी स्थित सामुदायिक भवन परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शिक्षा और मानवता की सेवा पर विशेष जोर दिया गया। इस कार्यक्रम में आर्थिक रूप से कमजोर स्कूली बच्चों के बीच वस्त्र वितरण किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए जानी-मानी समाजसेविका और अपर बाजार स्थित ‘बालाजी फैशन ड्यूक’ की संचालिका उषा पोद्दार ने कहा कि “शिक्षा के बिना सामाजिक नवनिर्माण संभव नहीं है।” उन्होंने अभिभावकों और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे बच्चों की शिक्षा के लिए आगे आएं।
श्रीमती पोद्दार ने कहा, “पीड़ित मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। जब हम किसी जरूरतमंद की मदद करते हैं, तो मिलने वाला सुकून करोड़ों की दौलत से बढ़कर होता है। आज आप जिसे शिक्षित करेंगे, वही भविष्य में डॉक्टर-इंजीनियर बनकर देश की सेवा करेगा।” उन्होंने विभिन्न धर्मों में निहित दान-पुण्य और सेवा भाव का उदाहरण देते हुए कहा कि दूसरों का दर्द देखने से इंसान का अहंकार टूटता है और मानवता का भाव जागृत होता है।
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सेवा सिर्फ दान नहीं, एक जिम्मेदारी है: मुकेश पोद्दार
कार्यक्रम में उपस्थित समाजसेवी और बालाजी फैशन ‘ड्यूक’ के संचालक मुकेश पोद्दार ने सेवा के व्यापक अर्थ पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “खुशी और ज्ञान बांटने से बढ़ते हैं। सेवा का अर्थ केवल धन देना ही नहीं है, बल्कि किसी बेसहारा बुजुर्ग को समय देना, जरूरतमंद बच्चे को पढ़ाना या किसी बीमार की सहायता करना भी सच्ची सेवा है।”
श्री पोद्दार ने मदर टेरेसा और बाबा आमटे जैसे महापुरुषों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यों से करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बनाई। उन्होंने उपस्थित लोगों का आह्वान करते हुए कहा कि यदि समाज का हर सक्षम व्यक्ति एक लाचार व्यक्ति का हाथ थाम ले, तो गरीबी और लाचारी का नामोनिशान मिट जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि पीड़ित मानवता की सेवा विकल्प नहीं, बल्कि हर जागरूक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है।
टीवीएल डेस्क, रांची



