अबुआ अखाडा
‘छोटा पुरी’ @ कोल्हान जहाँ आस्था की डोरी से बँधे हैं दारू ब्रह्मा
“The Voice Live 24×7” की विशेष प्रस्तुति ‘दारू ब्रह्मा’ में आज हम आपको एक ऐसी यात्रा पर ले जा रहे हैं, जहाँ सदियों पुरानी परंपरा और आधुनिक आस्था का अनूठा संगम मिलता है। झारखंड की पावन धरा, कोल्हान के हृदय स्थल में बसा ‘छोटा पुरी’ इन दिनों भक्ति के एक नए अध्याय का साक्षी बन रहा है।
सांस्कृतिक ताना-बाना:
ओड़िसा की जगन्नाथ संस्कृति केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह झारखंड के जनमानस की आत्मा में रची-बसी है। ‘अबुआ अखाडा’ की इस पहली कड़ी में हमारा प्रयास उस दिव्य स्थान को उजागर करना है, जिसे श्रद्धावश ‘छोटा पुरी’ कहा जाता है। यहाँ महाप्रभु जगन्नाथ के भव्य मंदिर का निर्माण केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि कोल्हान के भक्तों के अटूट विश्वास का साकार रूप है।
आस्था का केंद्र और दिव्य सानिध्य:
छोटा पुरी की महिमा अद्वितीय है। यहाँ एक ही प्रांगण में माता लक्ष्मी का ऐश्वर्य, महादेव की शांति, ठाकुर रानी का संरक्षण, माता शीतला की कृपा और शिल्प के देवता भगवान विश्वकर्मा का सानिध्य प्राप्त होता है। लेकिन यहाँ की सबसे विस्मयकारी शक्ति माँ जगतधात्री की महिमा में निहित है।
भक्ति की पराकाष्ठा:
आस्था की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि माँ जगतधात्री के प्रति भक्तों का समर्पण कालखंड की सीमाओं को लांघ चुका है। यह जानकर मन विस्मय और श्रद्धा से भर जाता है कि आने वाले दशक ही नहीं, बल्कि सन 2050 तक के लिए भक्तों ने माता की प्रतिमा और सेवा का सौभाग्य पहले ही बुक कर लिया है। यह इस स्थान की जीवंत ऊर्जा और भक्तों के अटूट प्रेम का जीवंत प्रमाण है।
‘दारू ब्रह्मा’ की इस श्रृंखला के माध्यम से हम कोल्हान की इस आध्यात्मिक विरासत को विश्व पटल पर लाने का प्रयास कर रहे हैं। छोटा पुरी में बन रहा महाप्रभु का यह मंदिर आने वाले समय में न केवल धर्म का केंद्र बनेगा, बल्कि ओड़िसा और झारखंड के सांस्कृतिक सेतु को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।
आइए, अबुआ अखाडा की इस विशेष कड़ी के माध्यम से अनुभव करें उस अलौकिक शांति और ऊर्जा का, जो केवल प्रभु जगन्नाथ के शरणागत होने पर ही प्राप्त होती है।




